

वाराणसी, 03 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सेवा प्रमुख पराग अभ्यंकर ने कहा कि भूखों का पेट भरने के साथ व्यक्ति को स्वावलंबी बनाना भी सेवा भारती का उद्देश्य है। वर्तमान में जो व्यक्ति हाथ फैलाकर खड़ा है वह कल अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए। इसके साथ ही वह व्यक्ति समाज के अन्य वंचित वर्ग को भी स्वावलंबी बना सके, सेवा भारती के स्वावलंबन आयाम का यही उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि जीवन रक्षण एवं समग्र विकास के लिए व्यक्ति का स्वावलंबी होना आवश्यक है।
पराग अभ्यंकर शनिवार को यहां शिवपुर कोइराजपुर स्थित संत अतुलानंद कांवेंट स्कूल में आयोजित राष्ट्रीय सेवा भारती के स्वावलंबन एवं वैभव श्री प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रशिक्षुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि संघ की प्रतिज्ञा में लिखा है कि अपने पवित्र हिंदू समाज का संरक्षण कर, उसकी सर्वांगीण उन्नति करना कार्यकर्ताओं का लक्ष्य है। इसके लिए आवश्यक है कि समाज के विभिन्न अंगों में जो अंतर है उसे दूर करें। उन्होंने कहा कि कमजोर वर्ग की इसी आवश्यकता को समझकर सेवा कार्यों में स्वावलंबन एवं वैभव श्री आयाम प्रारंभ हुआ।
उन्होंने बताया कि संपूर्ण भारत में 980 सेवा संस्थाओं के माध्यम से वनवासी, पर्वतीय क्षेत्र में रहने वाले लोग घुमंतू एवं दिव्यांग बंधुओं के बीच अनेक सेवा कार्य चल रहे हैं जिनका मातृ संगठन सेवा भारती है।
सेवा भारती में माताओं के योगदान की चर्चा करते हुए पराग अभ्यंकर ने कहा कि माताओं में सेवा भाव के साथ कुशल प्रबंधन का भी गुण रहता है। इस कारण माताएं सेवा कार्य अधिक अच्छा कर सकती हैं। समाज में सेवा की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीयों में सेवा का भाव हृदय में स्वतः उपजता है। दूसरों की सेवा करके स्वयं को धन्य अनुभव करना यह हमारी परंपरा में है। व्यक्ति को भोजन कराना यह तात्कालिक सेवा है। स्थाई सेवा के लिए उसको स्वावलंबी बनाना आवश्यक है। परम वैभव पर जाने के लिए सभी को उन्नति और विकास का समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक वर्षों में सेवा भारती का चिंतन शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर था। वर्तमान में 35000 बाल संस्कार केंद्र एवं कोचिंग सेंटर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, परंतु व्यक्ति का अपने एवं अपने परिवार का भरण पोषण भी आवश्यक है। अतः उसकी आजीविका में भी सहयोग किया जाना सेवा भारती का लक्ष्य है।
प्रशिक्षण वर्ग की अध्यक्षता करते हुए सेवा भारती काशी प्रांत के प्रांत अध्यक्ष राहुल सिंह ने कहा कि यह स्वावलंबन एवं प्रशिक्षण वर्ग समाज के अंतिम व्यक्ति तक को लाभान्वित करेगा।
अखिल भारतीय स्वावलंबन प्रमुख विनोद बिड़ला ने कहा कि इस प्रशिक्षण वर्ग में ई-मार्केटिंग, रोजगार सृजन के लिए विभिन्न विषय समूह परिचर्चा एवं अनुभव कथन के कुल 10 सत्र रहेंगे। इस प्रशिक्षण वर्ग में भारत के 37 प्रांतों से दो सौ से अधिक संख्या में प्रशिक्षु भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम में वैभव श्री की अखिल भारतीय संयोजिका चन्द्रिका ताई चौहान भी मंचासीन रहीं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन किया गया। एकल गीत प्रतिभा ने प्रस्तुत किया। उद्घाटन सत्र में संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख सैंथिल कुमार, सेवा भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री सुधीर कुमार, संयुक्त महामंत्री विजय पुराणिक, वैभव श्री के राष्ट्रीय संयोजक पद्म कुमार, पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र सेवा प्रमुख युद्धवीर, काशी प्रांत के सह प्रांत कार्यवाह प्रो. राकेश तिवारी, प्रांत प्रचारक रमेश सहित बड़ी संख्या में प्रशिक्षु एवं मातृशक्ति उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण वर्ग में देशभर से आए स्वावलंबन एवं वैभव श्री आयाम से लाभान्वित महिला एवं पुरुषों ने हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। इसमें पत्थर से बने थ्री कट आर्ट (जीआई उत्पाद), देशी गाय के गोबर से बने विभिन्न उत्पाद, घरेलू सजावट की वस्तुएं, अचार, मुरब्बा, हथकरघे से निर्मित वस्त्र, राखी, मोमबत्ती, धूप, जूट एवं कपड़ों से निर्मित झोले इत्यादि का स्टाल लगाया गया था। यह प्रदर्शनी दो दिन चलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी