पतंजलि में जुटे शंकराचार्य समेत सैकड़ों संत, सनातन शास्त्र शुद्धि के लिए बनी समिति, विद्वत और संत परिषद का गठन

30 Oct 2026 19:48:53
पतंजलि विश्वविद्यालय सभागार


दूसरे दिन के सम्मेलन का उद्घाटन करते संत


हरिद्वार, 30 अक्टूबर (हि.स.)।

सनातन परंपरा और शास्त्रों की प्रामाणिकता को बचाने के लिए पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार में देशभर के धर्माचार्यों ने बड़ा कदम उठाया है। अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन के दूसरे दिन जगद्गुरु शंकराचार्यों, अखिल भारतीय संत समिति, 13 अखाड़ों, विभिन्न गुरु परंपराओं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ‘सनातन शास्त्र शुद्धि समिति’ के गठन पर सर्वसम्मति बनी।

इस समिति के तहत दो परिषदें बनाई गई हैं। विद्वत परिषद और संत-संन्यासी परिषद। विद्वत परिषद में आचार्यों, शास्त्रों के ज्ञाताओं और विभिन्न विषयों के विद्वानों को शामिल किया जाएगा, जिसमें सिख, जैन और बौद्ध परंपराओं का भी प्रतिनिधित्व होगा। यह परिषद शास्त्रों में हुई कथित मिलावट, प्रक्षेपण और विकृतियों का अध्ययन कर रिपोर्ट संत-संन्यासी परिषद को सौंपेगी। रिपोर्ट का परीक्षण समिति का मार्गदर्शक मंडल करेगा, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

संत-संन्यासी परिषद के संयोजक की जिम्मेदारी आचार्य महासभा के स्वामी परमात्मानंद जी को और विद्वत परिषद के संयोजक की जिम्मेदारी केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी को सौंपी गई है।

इस अवसर पर योग ऋषि स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण द्वारा लिखित वैज्ञानिक ग्रंथ ‘वैदिक आख्यान विज्ञान’ का भी विमोचन किया गया।

शास्त्रों में मिलावट का षड्यंत्र: स्वामी रामदेव -

स्वामी रामदेव ने कहा कि वेद विरुद्ध आचरण और गौहत्या करने वालों का सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक बहिष्कार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मिलावटी शास्त्रों और एआई टूल्स जैसे चैट जीपीटी, जैमिनी का सहारा लेकर देवी-देवताओं, राम, सीता, ब्रह्मा, शिव, कृष्ण के बारे में मिथ्या आरोप लगा रहे हैं। हमारे विद्वानों ने पुरुषार्थ करके वेदों में कोई प्रक्षेप नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि भारत को साजिश से आर्थिक, वैचारिक रूप से दरिद्र बनाया गया, जाति, भाषा, आर्य-द्रविड़ के नाम पर लड़वाया गया।

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि विकृत किए गए इतिहास का सनातन दृष्टि से पुनर्लेखन का बड़ा कार्य पतंजलि में चल रहा है और शुद्धि अभियान को योजनाबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

धर्माचार्यों ने किया समर्थन-

कार्ष्णि पीठाधीश्वर गुरु शरणानंद जी ने कहा कि समिति में शुद्ध आचरण वाले, त्रिकाल संध्या करने वाले विद्वान होने चाहिए। विद्या गुरु कृपा से आती है। मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास जी ने कहा कि विधर्मियों द्वारा सनातन पर आक्षेप का कड़े स्वर में प्रतिरोध होना चाहिए। वेद ही परम प्रमाण है।

जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि ने ऑनलाइन उद्बोधन में कहा कि धर्मग्रंथों में भेद और द्वेष पैदा करने के लिए बाद में बातें जोड़ी गईं। हजारों करोड़ रुपये भारत को अस्थिर करने के लिए खर्च हो रहे हैं। सभी शीर्ष महापुरुष एकजुट होकर ही इसका समाधान कर सकते हैं।

विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि सनातन सबकी समानता की बात करता है, किसी को अछूत कहकर भेदभाव करना भगवान का अपमान है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल ने कहा कि सनातन केवल टोलरेट नहीं, बल्कि सबको एक्सेप्ट करता है।

सम्मेलन में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी गोविंददेव गिरि, स्वामी चिदानंद सरस्वती, साध्वी ऋतंभरा, महंत रविंद्र पुरी समेत 40 से अधिक विद्वानों और देशभर के 23 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भाग लिया और शास्त्र शुद्धि को वर्तमान युग की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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