प्रदूषण नियंत्रण के लिए 5 से 20 नवंबर तक एनसीआर में निर्माण गतिविधियों पर लगेगी रोक: भूपेंद्र यादव

30 Oct 2026 19:31:53
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने  सीएक्यूएम  के नवनिर्मित एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर ‘पवन-I3सी’ का किया दौरा


- सीएक्यूएम के ‘पवन-I3सी’ कमांड सेंटर से होगी प्रदूषण की रियल टाइम निगरानी

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (हि.स.)।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम ) के नवनिर्मित एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर ‘पवन-I3सी’ का दौरा कर वायु प्रदूषण नियंत्रण की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए अब केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय उसकी पहले से पहचान कर वास्तविक समय में कार्रवाई करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में 5 से 20 नवंबर तक निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियां बंद रखी जाएंगी।

मंत्री ने कहा कि क्षेत्रीय वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सबसे जरूरी है कि सटीक, स्थानीय स्तर का डेटा उपलब्ध हो और पूरी व्यवस्था पारदर्शी रहे। ‘पवन-I3सी’ इस दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा। इससे विभिन्न एजेंसियों के बीच डेटा के बंटवारे की समस्या दूर होगी और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की पहचान कर कुछ ही मिनटों में कार्रवाई की जा सकेगी।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा सुनिश्चित करना किसी एक एजेंसी या राज्य की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए सभी संबंधित एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा। नए कमांड सेंटर के माध्यम से खेतों में पराली जलाने, उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण और बिना ढके निर्माण स्थलों जैसी गतिविधियों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि निगरानी प्रणाली से मिलने वाले अलर्ट पर बिना देरी के कार्रवाई सुनिश्चित करें।

नियमों का उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई

भूपेंद्र यादव ने कहा कि निर्धारित मानकों, वैधानिक निर्देशों या अनुपालन संबंधी शर्तों का उल्लंघन होने पर यह प्रणाली संबंधित एजेंसी को अलर्ट भेजेगी। इससे प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों, नियमों का पालन नहीं करने वाले स्रोतों और यातायात जाम वाले संवेदनशील क्षेत्रों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी।

उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था मैनुअल निगरानी और एजेंसियों की ओर से भेजी जाने वाली रिपोर्ट पर निर्भरता कम करेगी। इससे विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत होगा, नागरिकों की शिकायतों का तेजी से समाधान होगा और प्रदूषण के स्तर में अचानक बढ़ोतरी होने पर तत्काल कदम उठाए जा सकेंगे।

कमांड सेंटर में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की राज्य कार्ययोजनाओं की भी निगरानी होगी। इसमें वायु गुणवत्ता, पराली प्रबंधन, वाहन प्रदूषण, निर्माण गतिविधियां, सड़क की धूल, ठोस कचरा प्रबंधन, औद्योगिक प्रदूषण, डीजल जनरेटर सेट और हरित शवदाह गृहों से जुड़े कार्यों की समीक्षा की जाएगी।

इस अवसर पर सीएक्यूएम के अध्यक्ष राजेश वर्मा, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष एवं पर्यावरण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. अमनदीप गर्ग सहित मंत्रालय, आयोग और सीपीसीबी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

क्या है सीएक्यूएम का ‘पवन-I3सी’ डिजिटल कमांड सेंटर

सीएक्यूएम का ‘पवन-I3सी’ एक डिजिटल कमांड सेंटर है, जो 30 से अधिक एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस और विभिन्न डेटा स्रोतों को एक मंच पर जोड़ता है। इसमें वायु गुणवत्ता, औद्योगिक उत्सर्जन, मौसम, उपग्रह से प्राप्त जानकारी, कैमरों, वाहनों की आवाजाही, यातायात जाम, नागरिक शिकायतों और नियमों के अनुपालन से जुड़ा डेटा शामिल है।

इस प्रणाली में दिल्ली-एनसीआर के 111 निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों, 2,300 से अधिक उद्योगों और 3,200 से अधिक सक्रिय निर्माण स्थलों का डेटा भी शामिल किया गया है।

यह प्लेटफॉर्म ‘पहचान, विश्लेषण और कार्रवाई’ के सिद्धांत पर काम करता है। इसके माध्यम से प्रदूषण के स्तर का वास्तविक समय और पुराने आंकड़ों के आधार पर विश्लेषण किया जा सकेगा। साथ ही, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, नियंत्रण उपायों की प्रभावशीलता का आकलन और निर्धारित मानकों के अनुपालन की निगरानी की जाएगी। कमांड सेंटर में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के निगरानी केंद्रों से वायु गुणवत्ता के आंकड़े प्राप्त होंगे। उद्योगों से निकलने वाले पीएम, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड के उत्सर्जन की भी निगरानी की जाएगी।

इसके अलावा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई ), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से प्राप्त उपग्रह आधारित आंकड़ों के जरिए पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जाएगी। पिछले छह वर्षों के आंकड़ों से इन घटनाओं की तुलना भी की जा सकेगी।

निर्माण स्थलों पर लगे कैमरों और पीएम सेंसर, मौसम की स्थिति, हवा की गति एवं दिशा, बारिश और नमी से संबंधित आंकड़ों को भी इस प्रणाली में शामिल किया गया है। ओखला, भलस्वा, गाजीपुर, ग्रेटर नोएडा और भंडवारी के लैंडफिल स्थलों की गतिविधियों की निगरानी भी की जाएगी। इसके साथ ही मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की गतिविधियों और हरियाणा तथा पंजाब में ईंट भट्ठों के निर्धारित जैव ईंधन संबंधी मानकों के अनुपालन पर भी नजर रखी जाएगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

Powered By Sangraha 9.0