मूल समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए घुसपैठ और जनसंख्या जिहाद जैसे मुद्दे उठाए जाते हैंः मौलाना महमूद मदनी

31 Oct 2026 17:34:53
मौलाना महमूद मदनी


जमीअत उलमा


नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (हि.स.)। जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि जो लोग मुसलमानों को उनके ही देश में पराया और दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वे वास्तव में देश के दुश्मन हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमान किसी की दया पर नहीं बल्कि अपने पूर्वजों की कुर्बानियों और देश की आजादी में योगदान के आधार पर इस मुल्क के नागरिक हैं।

मौलाना मदनी 30 और 31 अक्टूबर को हरियाणा के नूंह स्थित डीएलडी स्प्रिंगफील्ड, पीपाका, मेवात में आयोजित जमीअत उलमा-ए-हिंद की दो दिवसीय कार्यकारिणी समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में देश की वर्तमान स्थिति, समान नागरिक संहिता (यूसीसी), वक्फ संपत्तियों, फिलिस्तीन और संगठनात्मक गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा हुई। मौलाना मदनी ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक भावना और संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने के प्रयास हो रहे हैं। उनके अनुसार, पिछले एक वर्ष में नफरत भरे भाषणों की 1,600 से अधिक प्रमाणित घटनाएं सामने आईं, जिनमें 87 प्रतिशत मामलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई।

बुलडोजर कार्रवाई की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के बिना किसी नागरिक का घर या संपत्ति ध्वस्त करना संविधान, कानून के शासन और न्यायपालिका की गरिमा का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को न्यायाधीश और दंडाधिकारी की भूमिका नहीं निभानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और आर्थिक चुनौतियों से ध्यान हटाने के लिए घुसपैठ और जनसंख्या जिहाद जैसे मुद्दे उठाए जाते हैं।

कार्यकारिणी समिति में पारित प्रस्तावों में मुसलमानों के खिलाफ नफरत, मॉब लिंचिंग पर रोक लगाने की मांग की गई। समिति ने सुप्रीम कोर्ट के तहसीन पूनावाला फैसले के दिशा-निर्देशों के अनुसार जिलों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने और नफरत आधारित अपराधों के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने की मांग की। इसके अलावा वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 पर पुनर्विचार करने तथा वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और प्रबंधन के लिए स्वतंत्र एवं अधिकार-संपन्न संस्था गठित करने का प्रस्ताव रखा गया। फिलिस्तीन के मुद्दे पर समिति ने स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना, गाजा में मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति, युद्धविराम, मस्जिद-ए-अक्सा की सुरक्षा और युद्ध अपराधों के जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने की मांग की।

घोषणापत्र में जमीअत ने राष्ट्रीय एकता, सांप्रदायिक सद्भाव और सभी कमजोर एवं वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। मौलाना मदनी ने युवाओं से निराशा छोड़कर साहस और दृढ़ संकल्प के साथ अन्याय का मुकाबला करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस्लाम की रक्षा केवल नारों और भाषणों से नहीं, बल्कि अपने जीवन में इस्लामी शिक्षाओं को अपनाने से होती है।

बैठक में दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी, मौलाना सलमान बिजनौरी, मौलाना रहमतुल्लाह मीर कश्मीरी और मौलाना सलमान मंसूरपुरी सहित देशभर के प्रमुख उलमा एवं पदाधिकारी शामिल हुए। इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। बैठक के अंत में संगठन की केंद्रीय से लेकर स्थानीय इकाइयों को वार्षिक कार्ययोजना तैयार कर नियमित रूप से लागू करने का निर्देश दिया गया।

हिन्दुस्थान समाचार /अब्दुल वाहिद

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हिन्दुस्थान समाचार / Abdul Wahid

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