उदासीन परंपरा सनातन धर्म की जीवंत धारा है : राजनाथ सिंह

05 Oct 2026 20:22:53
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को स्मृति चिन्ह दिया गया


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह संबोधित करते हुए


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंच पर उपस्थित


मंच पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का सम्मान


- श्री नारायण संस्कृत महाविद्यालय के नवनिर्मित भवन को देखकर राजनाथ सिंह ने प्रसन्नता जताई

- योगी सरकार के संरक्षण में शासन व्यवस्था और सनातन व्यवस्था दोनों उत्कर्ष को प्राप्त कर रही हैं : रक्षा मंत्री

अयोध्या, 05 अक्टूबर (हि.स.)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को राम नगरी अयाेध्या में उदासीन ऋषि आश्रम रानोपाली श्री गुरु पर्व महामहोत्सव एवं संत सम्मेलन में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर आयोजित संत सम्मेलन एवं समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उदासीन परंपरा सनातन धर्म की वह जीवंत धारा है, जिसने सदियों से भारत की आध्यात्मिक चेतना को पोषित किया है। अयोध्या पहुंचने पर राजनाथ सिंह ने हनुमानगढ़ी और श्रीराम मंदिर में दर्शन-पूजन किया। उदासीन आश्रम में संतों ने राजनाथ सिंह का माल्यार्पण और अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया।

उन्हाेंने कहा कि भारत की सभ्यता की एक बड़ी विशेषता यह रही है, कि यहाँ ज्ञान को केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रखा गया। ज्ञान को परम्परा बनाया गया। उस परम्परा को संस्कार बनाया गया और फिर संस्कार को, शिक्षा के माध्यम से, समाज के व्यवहार में उतारा गया। शिक्षा किसी भी सभ्यता की रीढ़ होती है और जब शिक्षा का माध्यम संस्कृत जैसी देवभाषा हो, तो उसका महत्व और भी बढ़ जाता है। आज जिस श्री नारायण संस्कृत महाविद्यालय को मैंने देखा, उसकी स्थापना, 1912 में बाबा श्री केशवराम जी महाराज ने की थी। यह हर्ष का विषय है कि उस परम्परा को, आज तक यहाँ के संत, यहाँ के आचार्य निभा रहे हैं।

मैं इस अवसर पर, श्री महंत डॉ. स्वामी भरत दास जी महाराज को हृदय से बधाई देता हूँ। उनके नेतृत्व में यह आश्रम निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। ये जो पूरी परम्परा है, इसका एक महत्वपूर्ण आधार संस्कृत है। संस्कृत को केवल एक भाषा नहीं समझा जाना चाहिए। संस्कृत के पास भारत की ज्ञान-परम्परा का एक विशाल भंडार है। वेदों से लेकर उपनिषद तक, दर्शन से लेकर व्याकरण तक, आयुर्वेद से लेकर गणित तक, ज्योतिष से लेकर साहित्य तक, न्याय से लेकर मीमांसा तक, भारतीय ज्ञान-परम्परा का एक बड़ा हिस्सा, संस्कृत के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ा और विश्व की बौद्धिक परंपराओं को इसने समृद्ध किया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार से प्रदेश के सभी विद्यालयों में वैदिक गणित पढ़ाने का आग्रह करेंगे। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के संरक्षण में शासन व्यवस्था और सनातन व्यवस्था दोनों उत्कर्ष को प्राप्त कर रही हैं। अयोध्या पहुंचने पर राजनाथ सिंह ने हनुमानगढ़ी और श्रीराम मंदिर में दर्शन-पूजन किया। उदासीन आश्रम में संतों ने राजनाथ सिंह का माल्यार्पण और अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया।

राजनाथ सिंह ने अयोध्या को केवल भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि चेतना, संस्कृति और सभ्यता का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने अयोध्या की धरती को पवित्र किया और यहां से धर्म, न्याय और मर्यादा का संदेश पूरी दुनिया में पहुंचा। श्री नारायण संस्कृत महाविद्यालय के नवनिर्मित भवन को देखकर राजनाथ सिंह ने प्रसन्नता जताई। आचार संहिता के कारण वह भवन का उद्घाटन नहीं कर सके। राम मंदिर आंदोलन में संतों के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि संतों ने जेल की यातनाएं सहीं और बलिदान दिए, इसलिए उनके त्याग को हमेशा याद किया जाएगा। केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने संस्कृत को देव भाषा और अध्यात्म की भाषा बताते हुए वैदिक गणित की विशेषता बताई और कहा कि लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में भी वैदिक गणित पढ़ाई जाती है।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह

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