अशोक सिंघल के शताब्दी वर्ष पर झांसी से सांस्कृतिक चेतना का शंखनाद

05 Oct 2026 21:47:53
मंच पर उपस्थित अतिथि


सभागार में जुटी भीड़


झांसी, 05 अक्टूबर (हि.स.)। विश्व हिंदू परिषद के संस्थापक अध्यक्ष श्रद्धेय अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर सोमवार को आयोजित धर्मसभा में सनातन संस्कृति, हिंदू चेतना और राष्ट्र निर्माण को लेकर वक्ताओं ने विचार रखे। कार्यक्रम में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेन्द्रानन्द महाराज और विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने अशोक सिंघल के योगदान को स्मरण करते हुए उनके अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

सुरेंद्र जैन ने कहा कि पितृपक्ष में पूर्वजों का स्मरण कर उनके गुणों और कार्यों को याद किया जाता है तथा अधूरे कार्य पूरे करने का संकल्प लिया जाता है। अशोक सिंघल हमारे मानस पिता के समान थे। उनके अधूरे कार्यों को पूरा करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि 1857 की क्रांति में झांसी की रानी राष्ट्रीय चेतना की प्रतीक बनीं, उसी प्रकार वर्तमान सांस्कृतिक चेतना के नायक अशोक सिंघल रहे।

जितेन्द्रानन्द महाराज ने कहा कि अशोक सिंघल ने ऐसे कार्य किए, जिन्हें करने की सामर्थ्य युगों में किसी-किसी व्यक्ति में होती है। उन्होंने रामजन्मभूमि आंदोलन, संतों के संगठन और सनातन की आवाज को मजबूती देने में सिंघल की भूमिका का उल्लेख किया। काशी में फिल्म ‘वाटर’ की शूटिंग के विरोध और 2010 के हरिद्वार कुंभ में 13 अखाड़ों को एक साथ शाही स्नान के लिए तैयार कराने की घटनाओं का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज अब आत्महीनता से आत्मगौरव की ओर बढ़ रहा है। Gen-Z का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को कुछ शहरी उदाहरणों से नहीं आंकना चाहिए। करोड़ों युवा कांवड़ यात्रा और तीर्थयात्राओं में भाग ले रहे हैं।

मंच पर आरएसएस के प्रांत सह प्रचारक मुनीष जी, पंडोखर सरकार, प्रांत अध्यक्ष राजीव महाना, प्रान्तीय उपाध्यक्ष विनोद अग्रवाल, प्रांत मंत्री राजू पोरवाल, वरिष्ठ समाजसेवी मैथिली शरण मुद्गिल समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन/व्यवस्था विभाग संगठन मंत्री सोमेंद्र ने किया। वक्ताओं ने अशोक सिंघल के विचारों को समाज तक पहुंचाने और सांस्कृतिक जागरण को गति देने का संकल्प दोहराया।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया

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