सीतारमण ने कहा- नए द्विपक्षीय निवेश संधि ढांचे को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी

05 Oct 2026 16:01:53
म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में एक चर्चा के दौरान वित्त मंत्री सीतारमण


नई दिल्ली, 05 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) का नया ढांचा तैयार है। इसे निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल बनाने के उद्देश्य से जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने की उम्मीद है। नए खाके को अंतिम रूप दिए जाने के बावजूद भारत निवेश सुरक्षा समझौतों पर बातचीत जारी रखे हुए है।

वित्त मंत्री सीतारमण नई दिल्ली में म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में एक चर्चा के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल से तैयार किए जा रहे नए खाके का उद्देश्य 2016 में मंजूर किए गए खाके की खामियों को दूर करना और दोनों देशों के निवेशकों को अधिक प्रभावी सुरक्षा प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान और कुछ मध्य एशियाई देशों के साथ भी इसी तरह के समझौते किए हैं। उन्होंने कहा कि हम कई देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं और उनमें नए खाके में शामिल कई और प्रावधानों को शामिल किया जा रहा है।

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की कनाडा और रूस समेत कई देशों के साथ द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौतों पर बातचीत जारी है। अगर बातचीत उम्मीद के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो कनाडा के साथ वार्ता दिसंबर या अगले साल की शुरुआत तक पूरी हो सकती है। भारत और अमेरिका व्यापार समझौते पर वित्त मंत्री ने कहा कि इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है और बातचीत ‘‘कठिन’’ रही है। हालांकि, हम यह मानना चाहेंगे कि दोनों पक्ष उस स्थिति तक पहुंच गए हैं, जहां से आगे कुछ देना या लेना बहुत, बहुत मुश्किल होगा। हालांकि, अगर आगे बढ़ने की कुछ गुंजाइश है, तो शायद दोनों पक्ष ऐसा करेंगे।

सीतारमण ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की प्रमुख विशेषता भारत के पक्ष में व्यापार असंतुलन है, अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका अपने नजरिये से उन चीजों की भरपाई करने की कोशिश करेगा, जिन्हें उसका मानना है कि उसने वर्षों से खोया है। चीन के साथ भारत के व्यापार संबंधों की तुलना करते हुए सीतारमण ने कहा कि व्यापार असंतुलन का पारंपरिक रूप से बातचीत के जरिये समाधान किया जाता रहा है और देश अपने सामान तथा सेवाओं के लिए अधिक बाजार पहुंच की मांग करते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए शुल्क का इस्तेमाल तेजी से एक साधन के रूप में किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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