हॉकी इंडिया लीग के बाद लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए नई टीम तैयार करना हमारा लक्ष्य : क्रेग फुल्टन

05 Oct 2026 15:31:53
भारतीय हॉकी टीम के साथ क्रेग फुल्टन


नई दिल्ली, 05 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने दो दिन पहले आइची-नागोया एशियाई खेलों में मलेशिया को फाइनल में 5-1 से हराकर अपने एशियाई खेलों के खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया। इस जीत के साथ हरमनप्रीत सिंह की अगुआई वाली भारतीय टीम ने लॉस एंजिल्स-2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई भी कर लिया।

भारतीय पुरुष राष्ट्रीय हॉकी टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने साई मीडिया से विशेष बातचीत में कहा कि लॉस एंजिल्स ओलंपिक अब ज्यादा दूर नहीं है और हॉकी इंडिया लीग के बाद उन्हें नई टीम तैयार करने पर काम करना होगा। इसमें टीम में अधिक युवा खिलाड़ियों को शामिल कर अनुभव और युवा जोश के बीच बेहतर संतुलन बनाने पर जोर रहेगा।

फुल्टन ने कहा, “लॉस एंजिल्स 2028 दो साल के भीतर है। ऐसा लगता है कि अभी काफी समय है, लेकिन यह समय बहुत जल्दी आ जाता है। फिलहाल हम सही कार्यक्रम और सही योजना तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। हमें यह तय करना है कि दो साल पहले, एक साल पहले और छह महीने पहले हमारी तैयारी कैसी होनी चाहिए और उसी के अनुसार योजना बनानी है। हां, मुझे लगता है कि हर टीम में अनुभव और युवाओं के अपने चरण होते हैं। हमारे पास इस समय अनुभवी खिलाड़ियों का एक अच्छा समूह है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे पास कुछ युवा खिलाड़ी हैं, लेकिन भारतीय ए टीम और मजबूत अंडर-21 टीम में हमारे पास काफी युवा प्रतिभा है, जो शानदार है। इसलिए अगले दो-तीन महीनों में, मेरा मानना है कि हॉकी इंडिया लीग के बाद हम अपनी पूरी प्रतिभा पर नजर डालेंगे, नई टीम चुनेंगे और वहां से नए सिरे से शुरुआत करेंगे।”

यह भारतीय पुरुष हॉकी टीम का एशियाई खेलों में कुल पांचवां स्वर्ण पदक है। इससे पहले टीम ने 1966 बैंकॉक, 1998 बैंकॉक, 2014 इंचियोन और 2022 हांगझोउ एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था।

1996 और 2004 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में दक्षिण अफ्रीका का प्रतिनिधित्व कर चुके फुल्टन ने लगातार दो एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने को विशेष उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा, “व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए ये एशियाई खेल बहुत अनोखे रहे। यह पिछले एशियाई खेलों से बहुत अलग था, क्योंकि हम यहां अन्य स्पर्धाओं और खिलाड़ियों से एक तरह से अलग थे। यहां कोई तथाकथित खेल गांव नहीं था, लेकिन साथ ही हमारी अपनी दिनचर्या थी। हम मैदान पर जाते थे, खेलते थे, वापस आते थे और सब कुछ उसी तरह चलता था, लेकिन हांगझोउ में पहला स्वर्ण पदक जीतना बहुत खास था। लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर उसका बचाव करना हमेशा विशेष होता है।”

भारत ने गिफू प्रीफेक्चरल ग्रीन स्टेडियम में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को मैच के आखिरी क्षणों में 4-3 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। भारत ने एक समय 3-0 की बढ़त बना ली थी, लेकिन पाकिस्तान ने शानदार वापसी करते हुए स्कोर बराबर कर दिया था। हरमनप्रीत सिंह ने पांचवें और 13वें मिनट में तथा सुखजीत सिंह ने 23वें मिनट में गोल कर भारत को 3-0 की बढ़त दिलाई। इसके बाद अबू महमूद ने 30वें, हन्नान शाहिद ने 45वें और वहीद राणा ने 49वें मिनट में गोल कर पाकिस्तान को बराबरी पर ला दिया। अभिषेक ने मैच के अंतिम मिनट में गोल कर भारत को फाइनल में पहुंचाया।

पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले को लेकर फुल्टन ने कहा, “सब कुछ योजना के अनुसार ही हुआ। हमारा पहला हाफ वास्तव में बहुत अच्छा रहा, लेकिन तीसरा क्वार्टर मुश्किल था। पाकिस्तान ऐसी टीम है कि अगर आप उन्हें कोई भी मुफ्त अवसर देते हैं, तो वे उसे भुनाते हैं और वे एक शानदार टीम हैं, उन्होंने यह दिखाया भी। उन्होंने अच्छी वापसी की और 3-0 से 3-3 तक पहुंचकर हम पर काफी दबाव बनाया। उस दौरान भी हमारे पास कुछ अच्छे मौके थे, लेकिन हम उन्हें पूरा नहीं कर सके, गोल नहीं कर सके। फिर हमने आखिरी मिनट में गोल करने का रास्ता निकाला और चौथा गोल किया, जिसने हमें फाइनल में पहुंचने में मदद की।”

आइची-नागोया में भारतीय पुरुष और महिला दोनों हॉकी टीमों का स्वर्ण पदक जीतना एशियाई खेलों के इतिहास में पहली बार हुआ है। यह कबाट्डी और क्रिकेट के बाद आइची-नागोया में भारत की तीसरी टीम स्पर्धा रही, जिसमें पुरुष और महिला दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक जीता।

इस सफलता में भारतीय खेल प्राधिकरण के पुरुष और महिला हॉकी टीमों को दिए गए 77.8 करोड़ रुपये के सहयोग की भी अहम भूमिका रही। इसमें राष्ट्रीय कोचिंग शिविर, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अनुभव, विदेशी कोच के पारिश्रमिक और उपकरणों से जुड़ा सहयोग शामिल है।

फुल्टन ने भारतीय खेल प्राधिकरण और सरकार के समर्थन की सराहना करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि सरकार संसाधनों और धन के मामले में हमारी सबसे बड़ी समर्थक है, जो वे जमीनी स्तर के कार्यक्रमों से लेकर 18 वर्ष, 21 वर्ष और सीनियर स्तर तक मदद करने के लिए उपलब्ध कराते हैं। अगर वे इतना समर्थन और संसाधन नहीं देते तो मुझे नहीं पता कि क्या होता। लेकिन इसी समर्थन की वजह से लड़कियां 44 साल में पहली बार पोडियम पर खड़ी होकर स्वर्ण जीतने में सफल हुईं। और हम लगातार दूसरी बार स्वर्ण जीतने में सफल रहे। हां, यह एशिया में दबदबा है।”

उन्होंने कहा, “हम निश्चित रूप से विश्व मंच पर भी ऐसा करना चाहते हैं। महिलाओं ने विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया और पुरुषों ने भी पेरिस में शानदार प्रदर्शन किया। इसलिए संतुलन मौजूद है। संसाधन मौजूद हैं, लेकिन मुख्य बात यह है कि हमें आगे बढ़ते रहना होगा, प्रतिभाओं को तलाशना होगा और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर अनुभव हासिल करने का अवसर देना होगा।”

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे

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