एडवांस्ड हाई-एल्टीट्यूड पैराशूट का पहला लाइव जंप, 13,700 फीट पर लैंडिंग की

06 Oct 2026 17:30:53
एडवांस्ड हाई-एल्टीट्यूड पैराशूट (एएचएपी) का पहला परीक्षण


- ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में एएचएपी पैराशूट का सामरिक इस्तेमाल कामयाब रहा

नई दिल्ली, 06 अक्टूबर (हि.स.)। कानपुर की ऑर्डिनेंस पैराशूट फैक्टरी में निर्मित एडवांस्ड हाई-एल्टीट्यूड पैराशूट (एएचएपी) का पहला परीक्षण मंगलवार को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने सबसे ज्यादा ऊंचाई वाले ड्रॉप जोन में से एक न्योमा पर किया। यह जंप समुद्र तल से 16 हजार फीट ऊपर किया गया। पैराशूट से पैराट्रूपर्स 15500 फीट से कूदे और 13,700 फीट पर लैंडिंग की। इस जंप ने बहुत ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में एएचएपी पैराशूट के असर और सामरिक इस्तेमाल को साबित किया।

डीआरडीओ के मुताबिक आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट ने इसे डिजाइन और विकसित किया है, जो पैराट्रूपर्स को बड़े पैमाने पर ड्रॉप करने के लिए एक स्टैटिक लाइन पैराशूट सिस्टम है। एएचएपी कई तरह के डिप्लॉयमेंट मोड देता है, इसकी ऑपरेशनल ऊंचाई रेंज बहुत बड़ी है (18 हजार फीट तक) और इसमें उतरने की सबसे सुरक्षित दर है, जो खास तौर पर ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों के लिए भारतीय रक्षा बलों की सामरिक जरूरतों के लिए सही है। ज्यादा ऊंचाई पर स्टैटिक लाइन पैराशूट जंप मुश्किल और स्वाभाविक रूप से जोखिम भरे होते हैं, क्योंकि ओपनिंग शॉक बहुत ज्यादा होता है और नीचे उतरने की दर भी बहुत ज्यादा होती है।

यह प्रणाली भारतीय रक्षा बलों के लिए 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत एक बहुत बड़ी तकनीकी सफलता है। यह बड़े पैमाने पर पैराट्रूपर्स (सैनिकों) को एक साथ सुरक्षित रूप से उतारने के लिए बनाई गई एक स्टैटिक लाइन पैराशूट प्रणाली है। यह पैराशूट प्रणाली 18 हजार फीट तक की अत्यधिक ऊंचाई वाले दुर्गम और कठिन पहाड़ी क्षेत्रों में भारतीय सेना की रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उपयुक्त है। उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हवा के कम दबाव और अत्यधिक गति के कारण पारंपरिक पैराशूट से छलांग लगाना बेहद जोखिम भरा होता है।

एएचएपी को विशेष रूप से इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि यह हवा के तेज झटकों को कम करता है और इसकी धीमी एवं सुरक्षित उतरने की गति सैनिकों को कठिन परिस्थितियों में भी सुरक्षित लैंडिंग की गारंटी देती है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एएचएपी स्वदेशी पैराशूट सिस्टम के पहले सफल लाइव जंप के लिए डीआरडीओ, रक्षा बलों, डीपीएसयू और इंडस्ट्री को बधाई दी और इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और बड़ा कदम बताया। रक्षा सचिव और डीआरडीओ के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने सिस्टम के डिजाइन और डेवलपमेंट से जुड़े टीम मेंबर्स को बधाई दी। --------------------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीत निगम

Powered By Sangraha 9.0