
- संसद के सेंट्रल हॉल में हुई विपक्षी नेताओं की बैठक, उमर अब्दुल्ला से रेवंत रेड्डी तक कई नेता हुए शामिल
नई दिल्ली, 09 अक्टूबर (हि.स.)।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच इंडी गठबंधन ने शुक्रवार को अपना विरोध तेज करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों और चिंताओं को राष्ट्रपति के सामने रखा। इससे पहले संसद भवन के सेंट्रल हॉल में गठबंधन के सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सहित विपक्ष के कई प्रमुख चेहरे सक्रिय रहे। तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी भी इस राजनीतिक गतिविधि में शामिल हुए। गठबंधन के नेताओं की मौजूदगी ने इस मुद्दे पर विपक्ष की साझा रणनीति को रेखांकित किया। उनका आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं और इससे मतदान के अधिकार पर सवाल खड़े होते हैं। गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने और हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग उठाई है।
विपक्षी नेताओं ने चुनाव में ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग भी उठाई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद बताया कि राष्ट्रपति ने चुनाव में कथित अनियमितताओं के आरोपों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा। यह बातचीत ज्ञापन सौंपने के बाद हुई।
राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले संसद के सेंट्रल हॉल में इंडी गठबंधन के सांसदों और नेताओं की बैठक हुई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस बैठक में करीब 150 सांसद शामिल हुए और 16 अलग-अलग दलों के नेताओं ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद विपक्षी सांसद राष्ट्रपति भवन की ओर रवाना हुए। हालांकि, राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल का आकार इससे छोटा रखा गया था।
इस राजनीतिक गतिविधि में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, रेवंत रेड्डी और ममता बनर्जी सहित विभिन्न विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी चर्चा में रही। तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी भी गठबंधन की गतिविधियों में शामिल हुए। अलग-अलग राज्यों के नेताओं की मौजूदगी के जरिए विपक्ष ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी साझा चिंता सामने रखी।
इंडी गठबंधन का यह कदम दिल्ली में लगातार चौथे दिनों भी विरोध प्रदर्शन जारी है। इससे पहले विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च करने की कोशिश की थी। इसके बाद जंतर-मंतर और गुरुवार को राजघाट पर भी विरोध प्रदर्शन किया गया। इन प्रदर्शनों के दौरान राहुल गांधी सहित कुछ विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया था।
विपक्ष इस पूरे अभियान को मताधिकार और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बता रहा है। वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष है कि एसआईआर की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है और मतदाता सूची में मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट तथा अन्य अपात्र नामों की पहचान करना इसका हिस्सा है। इस तरह मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है।
कुल मिलाकर, राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपना इंडी गठबंधन के विरोध अभियान का एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम रहा। अब इस मामले में राष्ट्रपति की ओर से क्या कदम उठाया जाता है और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सौरव राय