
1.20 करोड़ से ज्यादा किसानों की बनी डिजिटल आईडी, 4 करोड़ से अधिक खेतों का सर्वे और जियो रेफरेंसिंग
भोपाल, 01 नवम्बर (हि.स.)। केन्द्र सरकार की एग्रीस्टैक के बेहतर क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश प्रथम स्थान पर है। एग्रीस्टैक भारत की डिजिटल कृषि व्यवस्था की नींव है। यह सही समय पर किसानों को मदद पहुंचाती है। इसके अंतर्गत 1.20 करोड़ से ज्यादा किसानों की आईडी बनाई गई है। करीब 4 करोड़ से अधिक खेतों पर फसलों का सर्वे कर सभी खेतों का जियो रेफरेंस कराया गया है।
जनसंपर्क अधिकारी अवनीश सोमकुवर ने रविवार को बताया कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां किसानों के व्यापक हित में भावांतर योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। किसान कल्याण वर्ष में सरसों और सोयाबीन के लिए भावांतर योजना लागू की गई है। प्रदेश सरकार समग्र किसान कल्याण के लिए संकल्पित है। सरकार खेती को समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे किसानों के आर्थिक लाभ में वृद्धि हो।
उन्होंने बताया कि राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में व्यापक निर्णय लिये गये हैं। उड़द के उपार्जन पर एमएसपी के अलावा 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है। रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना में 15 जिलों के 4000 किसानों से 3000 मीट्रिक टन श्रीअन्न का उपार्जन किया गया है। उपार्जन के अलावा 1000 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि के हिसाब से उन्हें भुगतान किया गया है।
जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि कृषि उर्वरक वितरण एवं आपूर्ति समाधान प्रणाली-ई-विकास का उपयोग कर उर्वरक वितरण किया गया। यह पूरे देश में पहली बार हुआ है। इसके माध्यम से 48.34 पात्र किसानों को 34.46 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया। इसमें 3.94 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बचत हुई। इससे 764.65 करोड़ के उर्वरक अनुदान की बचत हुई है। इस व्यवस्था को अपनाने के लिए केन्द्र सरकार अन्य राज्यों से भी आग्रह कर रही है।
उन्होंने बताया कि किसानों के हित में मंडियों को आधुनिक सुविधाओं से सम्पन्न बनाया गया है। सफाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग प्लांट की स्थापना की जा रही है। वर्तमान में प्रदेश की 3 मंडियों में प्लांट कार्य कर रहा है। दस मिलियन टन क्षमता के तौल-कांटों की स्थापना की गई है। अभी 21 मंडियों में यह सुविधा है।
वहीं, फसल संबंधी परामर्श एवं जानकारी देने के लिए एक किसान हेल्पलाइन (155253) शुरू की गई है। कृषि विभाग नई योजना म.प्र. प्राकृतिक कृषि योजना लागू करने पर विचार कर रहा है। योजना में प्रत्येक जिले के 100 गांवों के 5-5 किसानों को 500 रुपये प्रतिमाह अनुदान देना प्रस्तावित है।
जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि किसानों के व्यापक हित में ब्याज रहित फसल ऋण योजना में 2025-26 में 35 लाख किसानों को 24 हजार करोड़ का फसल ऋण वितरित किया गया। वर्ष 2026-27 में अब तक 15 हजार करोड़ रुपये वितरित किए गए, जो पिछले साल की तुलना में 1250 करोड़ रुपये ज्यादा हैं। किसानों को वर्ष 2026-27 में 18.52 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक का वितरण किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत