
काठमांडू, 01 नवंबर (हि.स.)। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने औषधीय, वैज्ञानिक, कृषि, बागवानी और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए गांजे की नियंत्रित व्यावसायिक खेती और उत्पादन की व्यवस्था करने का सरकार को आदेश जारी किया है।
न्यायमूर्ति नहकुल सुवेदी और तिलप्रसाद श्रेष्ठ की संयुक्त पीठ ने मादक पदार्थ (नियंत्रण) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक नियमावली, मानक और कार्यविधि बनाने का सरकार को आदेश दिया है। अदालत ने परमादेश प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने के भीतर आवश्यक कानूनी प्रावधान कर गांजे की नियंत्रित खेती और उत्पादन की व्यवस्था करने को कहा है।
अधिवक्ता सरोज अधिकारी सहित अन्य लोगों ने प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय को भी विपक्षी बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की थी।इसी रिट पर 18 मई, 2025 को दिए गए फैसले का पूर्ण पाठ तैयार किया गया है। 9 सितंबर, 2025 को जेन-जी आंदोलन के दौरान सुप्रीम कोर्ट में आगजनी के कारण मुकदमे की फाइलें जल गई थीं। इसी वजह से फैसले का पूर्ण पाठ तैयार करने में समय लगा।
अदालत के आदेश के अनुसार गांजे की व्यावसायिक खेती, उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, उपयोग, बिक्री-वितरण तथा निर्यात-आयात के लिए लाइसेंस और अनुमति देने की कानूनी व्यवस्था करनी होगी। साथ ही, बिना अनुमति गांजे की अवैध खेती, उत्पादन, निर्माण, तैयारी और बिक्री-वितरण जैसी प्रतिबंधित गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए कड़े नियमन और निगरानी तंत्र का निर्माण भी करना होगा।
इससे पहले संघीय संसद में भी गांजे की व्यावसायिक खेती के लिए कानून बनाने के उद्देश्य से सांसदों ने एक गैर-सरकारी विधेयक पंजीकृत कराया था। हालांकि, वह विधेयक संसद में आगे नहीं बढ़ सका।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मादक पदार्थ (नियंत्रण) अधिनियम जारी हुए करीब पांच दशक बीत जाने के बावजूद सरकार ने गांजे से संबंधित प्रावधानों को लागू करने के लिए आवश्यक नियम या आदेश जारी नहीं किए हैं। अदालत ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया है। अदालत के अनुसार कानून में निर्धारित शर्तों और प्रक्रियाओं के तहत गांजे की खेती, उत्पादन, बिक्री-वितरण और उपयोग की अनुमति दी गई है। लेकिन इन प्रावधानों को लागू करने के लिए आवश्यक नियमावली, कार्यविधि और मानक नहीं बनाए जाने के कारण कानून द्वारा दिए गए अवसरों का भी उपयोग नहीं हो सका है।
अधिनियम की धारा 4 के प्रतिबंधात्मक प्रावधान के अनुसार नेपाल के पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले गांजे से चरस का उत्पादन, संग्रह और परिवहन करने के लिए नियम बनाकर लाइसेंस दिया जा सकता है। इसी तरह, अधिनियम की धारा 5 में उपचार के लिए स्वीकृत चिकित्सक की सिफारिश पर लाइसेंस प्राप्त दुकान से मादक पदार्थ खरीदकर सेवन करने की व्यवस्था है। अदालत ने कहा कि कानून में निर्धारित वर्ग के लोगों को तय मात्रा में मादक पदार्थ सेवन करने की अनुमति देने का भी प्रावधान है।
अधिनियम की धारा 6 के तहत नेपाल सरकार से विशेष अनुमति प्राप्त कोई संस्था औषधि या वैज्ञानिक अनुसंधान के उद्देश्य से गांजे सहित अन्य मादक पदार्थों की खेती, तैयारी, उत्पादन, बिक्री-वितरण तथा निर्यात-आयात कर सकती है। हालांकि, इन कानूनी प्रावधानों को लागू करने के लिए अधिनियम की धारा 22 के अनुसार सरकार को नियम या आदेश जारी करना था। अदालत का निष्कर्ष है कि कानून जारी होने के करीब 50 वर्ष बाद भी ऐसा नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार नियम नहीं बनाए जाने के कारण नेपाल अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण व्यवस्था द्वारा स्वीकार किए गए गांजे के औषधीय उपयोग और वैज्ञानिक अनुसंधान से मिलने वाले संभावित लाभों का उपयोग नहीं कर सका है। अदालत ने लंबे समय तक कानून में निर्धारित प्रावधानों को लागू नहीं किए जाने को सरकारी निकायों द्वारा अपने कानूनी दायित्व का निर्वहन नहीं करने की स्थिति के रूप में व्याख्यायित किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि गांजे से संबंधित नियम बनाते समय सरकार को केवल प्राकृतिक रूप से उगने वाले जंगली गांजे तक सीमित रहने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने कहा कि अधिनियम की धारा 4 के प्रतिबंधात्मक प्रावधान में पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले गांजे के संबंध में नियम बनाने की व्यवस्था है, जबकि धारा 6 औषधि और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए गांजे की खेती और उत्पादन की अनुमति देती है।
अदालत ने अपने आदेश के आधार के रूप में अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था तथा गांजे पर हाल के अध्ययनों और अनुसंधानों को भी शामिल किया है।सुप्रीम कोर्ट के अनुसार वर्ष 1961 के मादक पदार्थों पर एकल अभिसमय (सिंगल कन्वेंशन ऑन नारकोटिक ड्रग्स, 1961) में नियंत्रित व्यवस्था के तहत गैर-औषधीय, बागवानी, कृषि तथा औद्योगिक उद्देश्यों के लिए गांजे की खेती की विशेष व्यवस्था की गई है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार हाल के विभिन्न अध्ययनों और अनुसंधानों ने गांजे के औषधीय महत्व को उजागर किया है। साथ ही, औद्योगिक उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल के रूप में भी इसकी उपयोगिता सामने आई है।
अदालत ने कहा कि नेपाल सरकार द्वारा स्वयं किए गए या कराए गए आधिकारिक अध्ययनों में भी औषधीय और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए गांजे की नियंत्रित खेती तथा उत्पादन की सिफारिश की गई है। इन सभी आधारों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने व्याख्या की है कि मादक पदार्थ (नियंत्रण) अधिनियम की भावना और अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था के विपरीत हुए बिना सरकार नियंत्रित प्रणाली के तहत गांजे की व्यावसायिक खेती, उत्पादन, प्रसंस्करण और बिक्री-वितरण की व्यवस्था कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने औषधीय और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए गांजे की नियंत्रित खेती की आवश्यक कानूनी व्यवस्था करने का आदेश दिया है, लेकिन मनोरंजन के लिए गांजे पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग को अस्वीकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि गांजे के मनोरंजनात्मक उपयोग को कानूनी मान्यता देना या किसी गतिविधि को अपराध की सूची से हटाना व्यवस्थापिका के अधिकार क्षेत्र में आता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास