दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडी गठबंधन की रैली, राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने कहा- ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना है

01 Nov 2026 18:45:53
: नई दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को इंडी गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली को संबोधित करते कांग्रेस नेता राहुल


नई दिल्ली, 01 नवंबर (हि.स.)। दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को विपक्षी दलों के इंडी गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 2024 का लोकसभा चुनाव अवैध था और उसमें मतदाताओं के नाम काटे गए थे। राहुल गांधी ने कहा कि देश को सही रास्ते पर लाने के लिए सबसे पहला कदम ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना है।

रैली से पहले विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक मार्च निकाला। मार्च में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव समेत विपक्षी दलों के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

खुले वाहन में सवार होकर पहुंचे नेताओं का रामलीला मैदान में स्वागत किया गया। इसके बाद मंच से विपक्षी नेताओं ने सभा को संबोधित किया। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की नेहा बोरा ने भी मंच से संबोधित किया। मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, ममता बनर्जी और महबूबा मुफ्ती के संबोधन के बाद राहुल गांधी ने मंच संभाला।

राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद से हटेंगे और उन्हें जेल जाना पड़ेगा। यह सामान्य चोरी नहीं बल्कि देश के हर नागरिक के वोट और उसकी आवाज की चोरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि अमित शाह कहते हैं कि नरेन्द्र मोदी कहीं नहीं जाएंगे लेकिन उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी। विपक्ष हिंसा और नफरत में विश्वास नहीं करता, उसका उद्देश्य देश में मोहब्बत और भाईचारे को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा कि हर भारतीय की आवाज विपक्ष के लिए जरूरी है। यह विरोध प्रदर्शन देश के लोकतंत्र को बचाने की आवाज है। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा किया जा रहा है। इसका असर किसानों, युवाओं और आम नागरिकों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसान को उसकी मेहनत का फल मिलना चाहिए और 18 घंटे पढ़ाई करने वाले छात्र को शिक्षा और रोजगार के रूप में उसका परिणाम मिलना चाहिए।

इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता ज्ञानेश कुमार को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। खरगे ने दावा किया कि महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश में जनता ने सरकारें नहीं चुनीं बल्कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी करके सरकारें बनाई गईं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बचाने के लिए मोदी को हटाना जरूरी है। खरगे ने कार्यकर्ताओं से संघर्ष जारी रखने की अपील की।

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि रामलीला मैदान आज लोकतंत्र की हल्दीघाटी बन गया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग वहां आए थे, उन्हें अब बाहर जाना पड़ेगा। अखिलेश ने दावा किया कि 2027 में भाजपा और उसके सहयोगियों की ऐसी विदाई होगी कि वे दोबारा सत्ता में नहीं लौट पाएंगे।

राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि आमतौर पर रामलीला मैदान में रामायण का मंचन होता है लेकिन आज यहां वोट चोरी के खिलाफ महाभारत हो रहा है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए उन्हें प्रधानमंत्री की कठपुतली बताया। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यदि लोग नहीं जागे तो लोकतंत्र और संविधान कमजोर हो जाएंगे। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर लड़ाई लड़ने की अपील की।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर लोगों का भरोसा खत्म हो गया है और प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए। कांग्रेस नेता कुमारी सैलजा ने कहा कि विपक्षी दलों और समर्थकों ने सरकार को सत्ता से हटाने का संकल्प लिया है।

रैली में विपक्ष की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा या उन्हें पद से हटाने, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के स्थान पर बैलेट पेपर की वापसी की मांग उठाई गई। रैली में कर्नाटक से आए कांग्रेस कार्यकर्ता मतदाता सूची की कई मीटर लंबी प्रतियां लेकर पहुंचे। कार्यकर्ताओं का दावा था कि इन नामों को एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटा दिया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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