अक्टूबर में भी सेलर बने रहे विदेशी निवेशक, हालांकि आखिरी सप्ताह में जमकर की खरीदारी

01 Nov 2026 19:43:53
प्रतीकात्मक


नई दिल्ली, 01 नवंबर (हि.स.)। अक्टूबर महीने के दौरान भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) लगातार बिकवाल (सेलर) की भूमिका में बने रहे। पूरे महीने के दौरान घरेलू बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बीच एफपीआई ने शेयरों की बिकवाली कर शुद्ध रूप से 34,843 करोड़ रुपये के निकासी कर ली। हालांकि, अक्टूबर के आखिरी कारोबारी सप्ताह यानी 26 से 30 अक्टूबर के दौरान विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव आया। इस सप्ताह विदेशी निवेशकों ने बिकवाली करने की जगह शेयर बाजार से करीब 6,300 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। इसके बावजूद पूरे महीने के कुल आंकड़ों में बिकवाली का पलड़ा भारी रहा, जिससे यह लगातार दूसरा ऐसा महीना बन गया जब विदेशी पूंजी का भारतीय बाजार से आउटफ्लो होता रहा।

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (सीडीएसएल) के ताजा आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर की इस ताजा बिकवाली के बाद साल 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजार से कुल 2.95 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि निकाल चुके हैं। अगर पिछले महीनों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों ने इससे पहले जुलाई में घरेलू बाजार में 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,631 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। लेकिन सितंबर महीने से उनकी रणनीति पूरी तरह बदल गई और उन्होंने 35,861 करोड़ रुपये की बड़ी निकासी करके बाजार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया, जो कि अक्टूबर में भी लगातार जारी रहा।

मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, विदेशी निवेशकों की इस लगातार हो रही बिकवाली के पीछे कई वैश्विक और घरेलू चिंताएं जिम्मेदार हैं। खुराना सिक्योरिटीज एंड फाइनेंशइयल सर्विसेज के सीईओ रवि चंदर खुराना का कहना है कि कच्चे तेल की लगातार ऊंचे स्तर पर पहुंची हुई कीमत, वैश्विक स्तर पर बढ़ती ब्याज दर और भारतीय कंपनियों की तिमाही कमाई (कॉरपोरेट अर्निंग्स) को लेकर बनी अनिश्चितता इसके प्रमुख कारण रहे हैं। उनके मुताबिक, महंगा क्रूड ऑयल भारत में महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मुनाफे पर सीधा दबाव डालने का काम करता है। इसके साथ ही, अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर मिल रही आकर्षक यील्ड और डॉलर की मजबूती के कारण विदेशी फंड तेजी से उभरते बाजारों से पैसा निकाल कर सुरक्षित अमेरिकी संपत्तियों की तरफ जा रहे हैं।

अक्टूबर के आखिरी चार कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों की बाजार में वापसी को लेकर धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने का निर्णय, भारतीय लार्ज-कैप शेयरों की आकर्षक स्तर पर वापसी और घरेलू अर्थव्यवस्था के संकेतकों की मजबूती इसके मुख्य कारण रहे हैं। इस आखिरी हफ्ते की लिवाली के सपोर्ट से ही निफ्टी एक बार फिर 23,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने में सफल रहा। हालांकि, इस दौरान भी विदेशी निवेशकों ने बड़े वित्तीय और फाइनेंशियल शेयरों से दूरी बनाए रखी और इन अपनी बिकवाली जारी रखी। दूसरी ओर, फार्मा, हेल्थकेयर और कुछ चुनिंदा डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों के शेयरों में उन्होंने खरीदारी करने पर अधिक जोर दिया।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अक्टूबर के आखिरी दिनों में एफपीआई निवेश में आया यह सकारात्मक बदलाव मार्केट सेंटिमेंट्स के लिहाज से काफी अच्छा है। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के एक्जेक्यूटिव डायरेक्टर अनिल भंसाली के अनुसार विदेशी निवेशकों की हालिया खरीदारी से बाजार को थोड़ी राहत जरूर मिली है लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमत का जोखिम और दूसरे ग्लोबल जियो पॉलिटिकल टेंशन बाजार की इस रफ्तार को सीमित कर सकते हैं। आने वाले दिनों में घरेलू निवेशकों और बाजार की नजर मुख्य रूप से अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजों, ब्रेंट क्रूड की चाल, अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध की परिस्थितियों के साथ-साथ कंपनियों के बाकी बचे तिमाही नतीजों पर टिकी रहेगी। जानकारों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक माहौल को देखते हुए यह मान लेना कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली पूरी तरह थम चुकी है, फिलहाल थोड़ी जल्दबाजी होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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