
नई दिल्ली, 02 नवंबर (हि.स.)। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने सोमवार को दिल्ली के उप-राज्यपाल तरनजीत सिंह संधू को पत्र लिखकर विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक आयोजनों के लिए शहर के बाहरी इलाकों में अलग से नियत स्थल अधिसूचित करने की मांग की है।
कारोबार संगठन का कहना है कि दिल्ली में औसतन प्रतिदिन 2200 करोड़ रुपये का व्यापार होता है। पिछले एक महीने में लगभग 14 दिन दिल्ली का सामान्य व्यापार प्रभावित हुआ है। दिल्ली देश का एक प्रमुख व्यापारिक एवं वितरण केंद्र है, जहां प्रतिदिन देश के विभिन्न राज्यों से लाखों व्यापारी खरीदारी करने और व्यापारिक गतिविधियों के लिए आते हैं। पिछले एक महीने से अधिक समय से बने अशांत माहौल, धरने-प्रदर्शनों और यातायात संबंधी व्यवधानों के कारण बड़ी संख्या में व्यापारी दिल्ली नहीं पहुंच सके। इसका सीधा असर थोक बाजारों, खुदरा व्यापार, छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, परिवहन, होटल एवं अन्य व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ा है।
कैट कहा कि व्यापारियों ने अपने कारोबार में हुए इस भारी नुकसान को स्वयं झेला है, लेकिन उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को अत्यंत गंभीरता से लिया है। किसी भी व्यक्ति या संगठन को शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर लाखों व्यापारियों के कारोबार, उनकी आजीविका और उनके मौलिक अधिकारों को प्रभावित करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। संविधान द्वारा प्रदत्त व्यापार करने और आजीविका अर्जित करने के अधिकारों का इस प्रकार बाधित होना गंभीर चिंता का विषय है।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा कि दिल्ली के व्यापारी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अपनी गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दीपावली के बाद दिल्ली के व्यापारिक संगठनों एवं प्रमुख व्यापारिक नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार-विमर्श कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि शेष त्योहारी सीजन में दिल्ली के व्यापारियों को बिना किसी बाधा, भय अथवा यातायात व्यवधान के अपना कारोबार करने का अवसर मिलेगा और बाजारों में सामान्य व्यापारिक गतिविधियां पूरी स्वतंत्रता के साथ संचालित हो सकेंगी।
कैट ने दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू से आग्रह किया है कि दिल्ली के बाहरी क्षेत्रों में विरोध-प्रदर्शनों के लिए कुछ निर्धारित स्थानों को शीघ्र अधिसूचित किया जाए, ताकि भविष्य में राजनीतिक धरने, रैलियां एवं प्रदर्शन दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों, बाजारों और आम नागरिकों की आवाजाही को प्रभावित न करें। इससे विरोध-प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार की भी रक्षा होगी और दिल्ली के व्यापार तथा आम जनता की आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियां भी निर्बाध रूप से चलती रहेंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर