आत्मपरिवर्तन राष्ट्र निर्माण की आधारशिला : जेपी नड्डा

02 Nov 2026 17:57:53
जन्मशताब्दी एवं अखण्ड दीप शताब्दी महोत्सव में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, डॉ. चिन्मय पण्ड्या एवं अन्य गणमान्य अतिथि।


नई दिल्ली, 02 नवंबर (हि.स.)। अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में यहां के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी एवं अखंड दीप शताब्दी महोत्सव के तीसरे दिन आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और राष्ट्र निर्माण के संकल्पों की अनूठी छटा देखने को मिली। समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आत्मपरिवर्तन को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने गायत्री मंत्र को नैतिक पतन के विरुद्ध सुरक्षा कवच बताते हुए आंतरिक परिष्कार से युग परिवर्तन का आह्वान किया।

समारोह का शुभारंभ देव संस्कृति विश्वविद्यालय की छात्राओं की मनोहारी समूह नृत्य प्रस्तुतियों से हुआ। छात्राओं ने ‘अब नवयुग की गंगोत्री से बही ज्ञान की धारा है’ भक्ति गीत और ‘लागी रे लगन ओ मां की’ प्रज्ञागीत पर भावपूर्ण प्रस्तुतियां देकर उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरुदेव एवं माताजी के आदर्शों और युग निर्माण की चेतना को जीवंत किया गया।

समारोह के दूसरे सत्र में जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की तप-साधना, करुणा और लोकमंगल के प्रति समर्पण तथा वंदनीया माताजी का त्यागपूर्ण मातृत्व संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है।

उन्होंने व्यक्ति के आत्मपरिष्कार, परिवार में श्रेष्ठ संस्कारों के संवर्धन तथा अपनी सामर्थ्य और संसाधनों को समाज एवं राष्ट्र के कल्याण में समर्पित करने के तीन प्रमुख संकल्पों पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि साधना केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में भी प्रकट होनी चाहिए।

नड्डा ने कहा कि नारी शक्ति, युवा शक्ति और सामाजिक शक्ति की संगठित सहभागिता से ही राष्ट्र निर्माण के संकल्प साकार होंगे। आत्मपरिवर्तन के माध्यम से व्यक्ति अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

जन्मशताब्दी समारोह के देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि अराजकता, अधर्म और नैतिक पतन के वातावरण में गायत्री मंत्र मनुष्य को भटकाव से बचाकर विवेक, सद्बुद्धि और श्रेष्ठ आचरण की दिशा प्रदान करता है। यह केवल उपासना का मंत्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और जीवन परिवर्तन की आध्यात्मिक शक्ति है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र का वास्तविक नव-निर्माण बाहरी व्यवस्थाओं से नहीं, बल्कि व्यक्ति के चिंतन, भावनाओं और दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन से होगा। आंतरिक परिष्कार ही श्रेष्ठ परिवार, सशक्त समाज और समर्थ राष्ट्र की आधारशिला है। व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन से ही युग परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि वास्तविक परिवर्तन केवल विचारों की अभिव्यक्ति से नहीं, बल्कि उन्हें जीवन और व्यवहार में उतारने से आता है। उन्होंने सामाजिक संवेदनशीलता, कर्तव्यनिष्ठा, शारीरिक स्वास्थ्य और मातृशक्ति के सम्मान को समाज की प्रगति के लिए आवश्यक बताया।

इस अवसर पर अंतर सिंह आर्य, रमनकांत, मनु गौड़, टीएस कल्याणरमन सहित अनेक गणमान्य अतिथि, प्रशासनिक अधिकारी तथा विभिन्न देशों से आए गायत्री साधक उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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