मानेकशा सेंटर में शुरू हुआ नौसेना का सालाना इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग

03 Nov 2026 19:06:53
मानेकशा सेंटर में नौसेना का सालाना इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग


- इंडो-पैसिफिक में साइंस, टेक्नोलॉजी और एकेडमिक कोऑपरेशन पर होगी चर्चा

नई दिल्ली, 03 नवंबर (हि.स.)। भारतीय नौसेना का सालाना इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग (आईपीआरडी) मंगलवार से मानेकशा सेंटर में शुरू हुआ। नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के साथ मिलकर तीन दिन की यह कॉन्फ्रेंस ‘इंडो-पैसिफिक में साइंस, टेक्नोलॉजी और एकेडमिक कोऑपरेशन’ विषय पर होगी, जिसमें वैज्ञानिक प्रगति और संस्थागत साझेदारियों को व्यावहारिक क्षेत्रीय सहयोग में बदलने पर खास जोर दिया जाएगा। पहले दिन साइंस और टेक्नोलॉजी में क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और एकेडमिक सहयोग के जरिए ज्ञान शेयर करने पर कई काम आने वाली नीतियों की सिफारिशें की गईं।

कार्यक्रम के पहले दिन बातचीत में मुख्य सवाल उठा कि इंडो-पैसिफिक साइंटिफिक नॉलेज और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन को कैसे लंबे समय तक चलने वाले इंस्टीट्यूशनल सहयोग, मजबूत समुद्री क्षमताओं और साझा क्षेत्रीय लचीलेपन में बदला जा सकता है। कार्रवाई की शुरुआत नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के चेयरमैन एवं पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी के उद्घाटन भाषण से हुई। इसके बाद वाइस एडमिरल बिस्वजीत दासगुप्ता (रिटायर्ड) ने मुख्य भाषण दिया।

आईपीआरडी का पहला सेशन ‘एकेडमिक नेटवर्क, रिसर्च और ह्यूमन कैपिटल डेवलपमेंट’ थीम पर फोकस था। इस सेशन का नेतृत्व नौसेना स्टाफ के पूर्व डिप्टी चीफ वाइस एडमिरल संजय महिंदरू (रिटायर्ड) ने किया और इसमें फ्रांस, इंडोनेशिया, जापान और मालदीव के नजरिए शामिल थे। इसमें इंडो-पैसिफिक के तटीय शहरों में विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग सहित हिंद महासागर में एक बड़े एकेडमिक नेटवर्क की संभावना पर चर्चा की गई और हिंद महासागर में सोशल-साइंस रिसर्च नेटवर्क की जांच की गई। इस सेशन में थिंक टैंक, यूनिवर्सिटीज और सरकारों के बीच करीबी रिश्तों पर भी बात की गई। इस सेशन के खत्म होने पर ‘सी ब्लाइंडनेस एंड मैरीटाइम हेरिटेज इन इंडिया’ नाम का एक मोनोग्राफ भी रिलीज किया गया।

कार्यक्रम के पहले दिन का दूसरा प्रोफेशनल सेशन ‘मैरीटाइम सिचुएशनल अवेयरनेस एंड प्रोटेक्शन ऑफ क्रिटिकल मैरीटाइम इंफ्रास्ट्रक्चर’ के मुद्दे पर केंद्रित रहा, जिसने समुद्री व्यापार और समुद्र के नीचे के क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा से जुड़ी आज की मैरीटाइम-अवेयरनेस चुनौतियों की गहराई पर रोशनी डाली। इसका नेतृत्व नौसेना के पूर्व डिप्टी चीफ वाइस एडमिरल तरुण सोबती (रिटायर्ड) ने किया। इसमें इंडो-पैसिफिक पार्टनरशिप फॉर मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस से जुड़े मौकों और चुनौतियों पर चर्चा की गई। खासकर जानकारी शेयर करने की प्रैक्टिकल जरूरतों पर और पानी के नीचे के डोमेन अवेयरनेस के लिए कोऑपरेटिव इंडो-पैसिफिक आर्किटेक्चर के डेवलपमेंट पर बात की गई।

दोनों प्रोफेशनल सेशन में चर्चा की गई कि समुद्री जानकारी शेयर करने को मजबूत करके, ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा करके, ओशनोग्राफिक जानकारी तक पहुंच को बेहतर बनाकर, क्लाइमेट से जुड़े जोखिमों के लिए जवाब देकर टेक्नोलॉजिकल सिस्टम और साइंटिफिक पार्टनरशिप को ऑपरेशन के लिए कैसे उपयोगी बनाया जा सकता है। इसके अलावा ‘सहयोग का संवाद’ कार्यक्रम में श्रीलंका की हाई कमिश्नर सुश्री महिषिनी कोलोन, फिलीपींस एम्बेसी की अधिकारी जोसेल एफ इग्नासियो और नॉर्वे किंगडम की एम्बेसडर मे-एलिन स्टेनर के साथ वार्ता की गई। इस बातचीत को नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के महानिदेशक वाइस एडमिरल प्रदीप चौहान (रिटायर्ड) ने होस्ट किया।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीत निगम

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