
हरिद्वार, 03 नवंबर (हि.स.)। गंगा स्नान कर पुण्य कमाने बिहार से हरिद्वार आए एक युवक की तीर्थयात्रा का फल किसी वरदान से कम नहीं रहा। हरिद्वार में गंगा स्नान और मंदिर दर्शन के दौरान 23 साल से लापता पिता अचानक दक्षेश्वर महादेव मंदिर में बेटे के सामने आ गए। पल भर में 23 साल की दूरी, बेबसी और इंतजार खत्म हो गया।
पिता का चेहरा बदल चुका था, दाढ़ी बढ़ी हुई थी, बाल बिखरे थे, शरीर पर उम्र का असर था, लेकिन बेटे की नजर धोखा नहीं खा सकी। उसने देखते ही पहचान लिया ये तो मेरे पिता हैं। फिर कनखल के दक्ष मंदिर परिसर में जो दृश्य दिखा, उसने वहां खड़े हर श्रद्धालु को भावुक कर दिया। दो जोड़ी आंखों से आंसू बह निकले और पिता-पुत्र एक दूसरे से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़े।
2003 में घर से निकले और लौटे नहीं-
यह वाकया बिहार के औरंगाबाद जिले के वेलसार गांव का है। 70 वर्षीय जवाहर मिस्त्री साल 2003 में अचानक घर छोड़कर चले गए थे। उस वक्त बेटा शशि कुमार शर्मा छोटा था। पिता के यूं चले जाने से परिवार टूट गया था। रिश्तेदारों, गांव, शहर, हर जगह तलाश की गई, थानों में सूचना दी गई, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला। साल दर साल बीतते गए और धीरे-धीरे परिवार ने मान लिया कि अब पिता कभी नहीं मिलेंगे।
इधर जवाहर मिस्त्री हरिद्वार पहुंच गए थे। यहां कनखल और आसपास के इलाकों में ही घूमते हुए, मंदिरों के आसपास रहकर उन्होंने अपनी जिंदगी काटनी शुरू कर दी। किसी को नहीं पता था कि वह कौन हैं, कहां से आए हैं?
दर्शन के दौरान सामने आए पिता-
दो दिन पहले शशि कुमार शर्मा अपने कुछ परिजनों के साथ तीर्थयात्रा पर हरिद्वार आए। कनखल स्थित पौराणिक दक्षेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन के दौरान उनकी नजर मंदिर परिसर में बैठे एक बुजुर्ग पर पड़ी। बढ़ी हुई दाढ़ी और उलझे बालों के बीच भी चेहरा कुछ जाना-पहचाना लगा। दिल ने कहा एक बार पास जाकर देखो।
शशि पास पहुंचे और गौर से देखा तो पैरों तले जमीन खिसक गई। वही आंखें, वही चेहरा जिसे वह 23 साल से यादों में देखते आए थे। उन्होंने धीरे से बाबूजी कहा तो बुजुर्ग ने भी बेटे को पहचान लिया। मंदिर में मौजूद पुजारियों और श्रद्धालुओं ने जब यह मिलन देखा तो सबकी आंखें नम हो गईं। किसी ने इसे महादेव का चमत्कार कहा, तो किसी ने गंगा मैया का आशीर्वाद।
सूचना पर कनखल पुलिस भी मौके पर पहुंची। इंस्पेक्टर देवेंद्र रावत ने बताया कि दोनों से पूछताछ में पहचान की पुष्टि हुई। इसके बाद पिता-पुत्र को सकुशल बिहार के लिए रवाना किया गया। शशि अपने पिता को लेकर ट्रेन से सोमवार रात औरंगाबाद लौट गए हैं।
बेटा बोला -ये महादेव का आशीर्वाद है-
शशि कुमार ने बताया कि 23 साल तक हर जगह पिता को तलाशा। उम्मीद लगभग खत्म हो गई थी। हरिद्वार तो सिर्फ गंगा दर्शन और भोले बाबा के दर्शन के लिए आए थे, लेकिन महादेव ने गोद में पिता को लौटा दिया। इससे बड़ा चमत्कार और क्या हो सकता है। यह भगवान का साक्षात आशीर्वाद है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला