चेन्नई, 04 नवंबर (हि.स.)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने चेन्नई में उच्चतम न्यायालय की एक शाखा स्थापित करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। तमिलनाडु सरकार की ओर से बुधवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में इसकी जानकारी दी गई।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री विजय ने कहा है कि तमिलनाडु सरकार ने उच्चतम न्यायालय की शाखा स्थापित करने के लिए न्यायाधीशों के पद के अनुरूप आवासीय सुविधाओं समेत सभी आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद सात अगस्त, 2007 को उच्चतम न्यायालय की पूर्ण पीठ ने अपने पूर्व के प्रस्तावों से अलग होने का कोई आधार नहीं माना था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान निर्माताओं की मंशा थी कि देश के प्रत्येक नागरिक को, चाहे वह गरीब हो या अमीर, न्यायालय तक सीधी पहुंच का अवसर मिले। इसी उद्देश्य से भारतीय संविधान में अनुच्छेद 32 को शामिल किया गया था। हालांकि, समय के साथ इस अनुच्छेद के तहत न्याय पाने का अधिकार व्यावहारिक रूप से उन लोगों तक सीमित होता जा रहा है, जो भौगोलिक रूप से उच्चतम न्यायालय के नजदीक रहते हैं और मुकदमे तथा यात्रा का खर्च वहन कर नई दिल्ली पहुंच सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के नागरिकों को नई दिल्ली और दक्षिण भारतीय राज्यों के बीच लंबी दूरी के कारण उच्चतम न्यायालय तक पहुंचने में विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में चेन्नई में उच्चतम न्यायालय की शाखा स्थापित होने से दक्षिण भारत के लोगों को न्याय पाने में सुविधा होगी।
पत्र में मुख्यमंत्री ने उच्चतम न्यायालय में दायर रिट याचिका (सिविल) संख्या 36/2016 (वी. वसंतकुमार बनाम एच.सी. भाटिया एवं अन्य) का भी उल्लेख किया है। इस मामले में 13 जुलाई, 2016 को जारी आदेश में उच्चतम न्यायालय की अलग-अलग पीठों की स्थापना समेत कई कानूनी मुद्दों पर विचार किया गया था। इन मुद्दों पर ठोस निर्णय के लिए पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ गठित करने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ को भेजा गया।
मुख्यमंत्री ने चेन्नई के महत्व और तमिलनाडु की लंबे समय से चली आ रही मांग का हवाला देते हुए उच्चतम न्यायालय से अपने पूर्व के रुख पर पुनर्विचार करने तथा चेन्नई में शाखा स्थापित करने के पक्ष में अनुकूल निर्णय लेने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।
तमिलनाडु सरकार की विज्ञप्ति में उच्चतम न्यायालय की शाखा चेन्नई में स्थापित करने के समर्थन में सात प्रमुख तर्क भी दिए गए हैं। इनमें संविधान का अनुच्छेद 130 प्रमुख है, जिसके उच्चतम न्यायालय दिल्ली के अलावा राष्ट्रपति की सहमति से भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा निर्धारित अन्य स्थानों पर भी बैठ सकता है। विज्ञप्ति के अनुसार, यह मांग वर्ष 1979 में आयोजित मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में भी चर्चा का विषय बनी थी, जबकि तमिलनाडु सरकार ने वर्ष 1980 में ही इसे उठाया था।
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि दक्षिण भारत के लोगों को न्याय पाने के लिए लंबी दूरी तय कर नई दिल्ली जाना पड़ता है। वहीं, मद्रास उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं के पास उच्च कानूनी ज्ञान और बहस की उत्कृष्ट क्षमता है। वे चेन्नई में स्थापित होने वाली उच्चतम न्यायालय की शाखा की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हैं।
विज्ञप्ति में मद्रास उच्च न्यायालय की ऐतिहासिक विरासत का भी उल्लेख किया गया है। इसकी स्थापना वर्ष 1862 में हुई थी और यह देश के सबसे पुराने तथा प्रतिष्ठित उच्च न्यायालयों में शामिल है।
तमिलनाडु सरकार के अनुसार, चेन्नई में उच्चतम न्यायालय की शाखा स्थापित करना देश के वास्तविक संघीय स्वरूप को भी प्रदर्शित करेगा। साथ ही, ऐसी शाखाओं का संपूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास ही रहेगा, जिससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित नहीं होगी।
मुख्यमंत्री ने इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए चेन्नई में उच्चतम न्यायालय की शाखा स्थापित करने की मांग पर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है।------------
हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV