अनादिकाल से नदी की अविरल धारा के समान निरंतर प्रवाहित हो रही भारतीय संस्कृति : एकनाथ शिंदे

04 Nov 2026 21:59:53
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे


वाराणसी,04 नवम्बर (हि.स.)। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि भारतीय संस्कृति अनादिकाल से नदी की अविरल धारा के समान निरंतर प्रवाहित हो रही है। यह प्रवाह कभी रुका नहीं है। उप मुख्यमंत्री बुधवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित संस्कृति संसद के दूसरे दिन के अन्तिम सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म जोड़ने का काम करता है, न कि तोड़ने का।

काशी और महाराष्ट्र का संबंध पुराना है। काशी के विद्वत् परिषद् के पंडित गागाभट्ट ने छत्रपति शिवाजी का राजतिलक संपन्न कराया था। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र संतों की भूमि है और काशी ज्ञान व अध्यात्म की भूमि है। उन्होंने कहा कि धर्म ही सर्वोच्च सत्ता है। राजनीति का स्थान धर्म के बाद है। धर्म के संपर्क में आने से राजनीति पवित्र होती है। उप मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि युवा हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। युवा का सम्मान भावी भारत का सम्मान है। युवा सनातन संस्कृति के रक्षक और वाहक हैं। भले ही कई शक्तियां युवाओं के आक्रोश की आड़ में आंदोलन का राष्ट्रविरोधी खेल खेल रही हैं, परंतु वे सफल नहीं होंगी। भारत का युवा धर्म एवं संस्कृति का सम्मान करता है। वर्तमान की विषम परिस्थित में हम युवाओं का आह्वाहन करते हैं कि युवा सनातन संस्कृति के रक्षक बनें और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दें।

काशी विद्वत् परिषद् ने उप मुख्यमंत्री शिंदे को दिया धर्म ध्वजा धारक सम्मान

संस्कृति संसद में श्रीकाशी विद्वत् परिषद् ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को उनके द्वारा सनातन धर्म की रक्षा के लिए किए गए कार्यों के सम्मानार्थ ‘धर्म ध्वजा धारक’ उपाधि से सम्मानित किया। सम्मान को ग्रहण करने के बाद एकनाथ शिंदे ने कहा कि श्रीकाशी विद्वत् परिषद् द्वारा दिया गया यह धर्म ध्वजा धारक सम्मान मेरा नहीं वरन् महाराष्ट्र की जनता का सम्मान है। इसी क्रम में दक्षिण भारत के संतों ने एकनाथ शिंदे को सेंगोल भेंट किया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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