नेपाल में भोटेकोशी–त्रिशूली बाढ़ में लापता 2,465 लोगों को मृत घोषित करने की प्रक्रिया शुरू, 7 देशों के 171 विदेशी भी शामिल

08 Nov 2026 09:50:53
शवों को जमीन में गाड़ने का काम


काठमांडू, 08 नवंबर (हि.स.)। नेपाल में 26 अगस्त को आई भोटेकोशी–त्रिशूली बाढ़ में लापता हुए लोगों में से पहले चरण में 2,465 लोगों को मृत घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इनमें 31 जिलों के 2,294 नेपाली नागरिक और सात देशों के 171 विदेशी नागरिक शामिल हैं। बाढ़ में कुल 5,286 लोगों के लापता होने का विवरण दर्ज किया गया था, जिनमें 636 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। शेष लापता लोगों का विवरण प्राप्त होने के बाद दूसरे चरण में उन्हें मृत घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

राष्ट्रीय विपद् व्यवस्थापन प्राधिकरण ने बताया है कि उसे 32 जिलों से लापता लोगों का विवरण प्राप्त हुआ है। प्राधिकरण के प्रवक्ता रामबहादुर केसी के अनुसार, मनांग जिले में कोई भी व्यक्ति लापता नहीं होने की पुष्टि हुई है।

प्राधिकरण ने रविवार को सार्वजनिक सूचना जारी कर कहा है कि यदि लापता व्यक्ति जीवित है या उसका पता चल गया है तो वह स्वयं अथवा उसके एक ही परिवार में रहने वाले सदस्य सात दिनों के भीतर अपना दावा पेश कर सकते हैं। सूचना में यह भी कहा गया है कि विवरण में किसी तरह की त्रुटि होने पर उसे सुधारा जा सकता है। निर्धारित सात दिनों के भीतर कोई दावा नहीं आने पर प्राधिकरण की कार्यकारी समिति की बैठक में सिफारिश की जाएगी और उसके बाद मंत्रिपरिषद संबंधित लोगों को मृत घोषित करेगी।

प्रवक्ता केसी के अनुसार, फिलहाल उन्हीं लोगों का विवरण शामिल किया गया है, जिनके स्थायी पते वाले स्थानीय निकाय की सिफारिश के आधार पर जिला विपद् व्यवस्थापन समिति ने विवरण की पुष्टि की है। केसी ने कहा, ''लापता लोगों के संबंध में 32 जिलों से विवरण प्राप्त हुआ है। दावा पेश करने के लिए सार्वजनिक सूचना जारी की गई है। इसके बाद कार्यकारी समिति निर्णय लेकर सिफारिश करेगी और मंत्रिपरिषद उन्हें मृत घोषित करेगी। अन्य जिलों से भी विवरण आ रहे हैं। दीपावली के बाद एक और सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी।''

विदेशी नागरिकों के मामले में संबंधित देशों के दूतावासों के माध्यम से विवरण प्राधिकरण को प्राप्त हुआ है। विदेशी नागरिकों के विवरण में किसी तरह का संशोधन कराने के लिए संबंधित पक्षों को विदेश मंत्रालय के कांसुलर विभाग से संपर्क करने को कहा गया है।

23 अक्टूबर को राजपत्र में प्रकाशित आपदा संबंधी कुछ नेपाल कानूनों में संशोधन के लिए जारी अध्यादेश के माध्यम से पहली बार लापता लोगों को मृत घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है। विपद् व्यवस्थापन अधिनियम, 2017 की धारा 34 के बाद नई धारा 34(क) जोड़कर इस संबंध में व्यवस्था की गई है।

नए कानूनी प्रावधान के अनुसार, किसी आपदा में लापता व्यक्ति को मृत घोषित करने का अधिकार राष्ट्रीय विपद् जोखिम न्यूनीकरण तथा व्यवस्थापन कार्यकारी समिति की सिफारिश पर नेपाल सरकार यानी मंत्रिपरिषद को दिया गया है। हालांकि, कार्यकारी समिति की सिफारिश से पहले आपदा में लापता नेपाली नागरिकों का विवरण संबंधित निकायों के माध्यम से संकलित कर निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

इसके तहत लापता व्यक्ति के स्थायी पते वाले स्थानीय निकाय की सिफारिश और संबंधित जिला विपद् व्यवस्थापन समिति के निर्णय सहित सूची राष्ट्रीय विपद् जोखिम न्यूनीकरण तथा व्यवस्थापन प्राधिकरण को भेजी जाती है। इसके बाद प्राधिकरण लापता लोगों का विवरण राष्ट्रीय स्तर के दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित कर सात दिनों के भीतर दावा पेश करने के लिए सार्वजनिक सूचना जारी करता है। सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद कार्यकारी समिति की सिफारिश पर नेपाल सरकार संबंधित व्यक्ति को मृत घोषित कर सकती है।

इससे पहले मुलुकी देवानी संहिता, 2017 की धारा 40 के तहत 80 वर्ष की आयु वाले व्यक्ति के मामले में पांच साल तक लापता रहने पर और किसी दुर्घटनाग्रस्त विमान, जहाज या अन्य वाहन में यात्रा कर रहे व्यक्ति के मामले में दुर्घटना के तीन साल बाद उसे मृतक के समान मानने का प्रावधान था।

इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति बिना किसी सूचना के लापता हो जाता था या किसी आपदा अथवा दुर्घटना का शिकार होता था, तो उसके परिजन न्यायिक रूप से मृत्यु की घोषणा कराने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते थे। इसके लिए व्यक्ति के लापता होने या मृत्यु की आशंका वाली तारीख, पता, कारण और आधार सहित आवेदन देना होता था। अदालत सबूतों और उपलब्ध प्रमाणों की जांच के बाद संबंधित व्यक्ति की मृत्यु की न्यायिक घोषणा कर सकती थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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