
नई दिल्ली, 01 फ़रवरी (हि.स.)। बजट में 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' की घोषणा पर काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के रिसर्चर ऋषभ जैन ने कहा कि रेयर अर्थ कॉरिडोर' की घोषणा राष्ट्रीय नीतियों और नियामकीय सुधारों से हटकर स्थानीय मूल्य संवर्धन के जरिए राज्य-स्तरीय कार्यान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। यह 'राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन' और हालिया 'मैग्नेट विनिर्माण योजना' को तटीय राज्यों में जमीन पर उतारकर उन्हें आगे बढ़ाती है। खनिज संपन्न राज्यों में आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थापित करके, हम अपस्ट्रीम माइनिंग (खनन) और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) के बीच के अंतर को पाट रहे हैं।
बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बजट कॉरिडोर को ठोस वित्तीय सहायता भी देता है, विशेष रूप से 'अनुसूची XII' के तहत खोज के लिए कर कटौती को विस्तार और प्रसंस्करण मशीनरी पर आयात शुल्क में छूट देकर। यह कदम सीधे तौर पर निजी क्षेत्र के प्रवेश से जुड़े जोखिमों को घटाता है।
'महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण पार्क', स्टॉकपाइलिंग नीति और एनसीएमएम के तहत बने उत्कृष्टता केंद्रों (एक्सिलेंस सेंटर) जैसी मौजूदा पहलों का लाभ उठाकर इसे लागू करने की रफ्तार बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि इन कॉरिडोर की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को घरेलू मांग सुरक्षित करने वाली 'ऑफटेक गारंटी' पर भी ध्यान देना होगा। साथ में, शोध और विकास को दोगुना करना होगा और जापान, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ साझेदारियों का लाभ उठाकर जटिल 'सिंटरिंग प्रक्रियाओं के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (प्रौद्योगिकी हस्तांतरण) को आसान बनाना होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी