क्वेटा, 01 फरवरी (हि.स.)। बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगियों को लेकर एक बार फिर चिंता गहरा गई है। बलूच यकजहती कमेटी (बीवाईसी) से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता महरंग बलूच ने दावा किया है कि हाल के मामलों से संकेत मिलता है कि यह प्रवृत्ति अब महिलाओं और लड़कियों तक भी फैल रही है, जिसे उन्होंने राज्य हिंसा में “खतरनाक बढ़ोतरी” करार दिया।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि लंबे समय से बलूच समुदाय को संदेह की नजर से देखा जाता रहा है और समस्याओं के समाधान के बजाय दबाव व बल प्रयोग का रास्ता अपनाया गया।
महरंग बलूच के मुताबिक, पहले ऐसे मामले अधिकतर पुरुषों तक सीमित बताए जाते थे, लेकिन अब छात्राओं, नाबालिग लड़कियों, गर्भवती महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों के प्रभावित होने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। उनका कहना है कि इनमें से कई का किसी राजनीतिक गतिविधि से संबंध नहीं बताया जाता।
उन्होंने यह भी कहा कि जब महिलाएं अपने परिजनों की तलाश में आवाज उठाती हैं और विरोध प्रदर्शन करती हैं, तो उन्हें निशाना बनाए जाने के आरोप लगते हैं। उनके अनुसार, डर का माहौल बनाकर समाज को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है, हालांकि इससे लोगों में जागरूकता और एकजुटता भी बढ़ रही है।
इसी बीच, कुछ मानवाधिकार संगठनों ने हालिया हफ्तों में कई नागरिकों के कथित तौर पर जबरन गायब किए जाने के आरोप लगाए हैं। ‘पांक’ नामक एक अधिकार समूह ने विभिन्न जिलों से कई व्यक्तियों के उठाए जाने के दावे किए और सुरक्षा बलों पर आरोप लगाए हैं। इन संगठनों ने स्वतंत्र जांच और प्रभावित लोगों की रिहाई की मांग की है।
सरकारी पक्ष की ओर से इन सभी आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विश्लेषकों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय