
- भारतीय पत्रकारिता के अबूझ पहलुओं की महागाथा है “समग्र भारतीय पत्रकारिता”
भोपाल, 12 फरवरी (हि.स.)। ‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ ग्रंथ का विमोचन शुक्रवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में मूर्धन्य संपादक त्रय हरिवंश, रामबहादुर राय और अच्युतानंद मिश्र करेंगे।
जनसम्पर्क अधिकारी संजय सक्सेना ने गुरुवार को बताया कि भारत में पत्रकारिता ने 246 साल की ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर ली है। यह यात्रा नव जागरण आंदोलन के साथ-साथ चली है। इस यात्रा में राष्ट्रीयता के अनेक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। ज्ञान तीर्थ सप्रे संग्रहालय भोपाल के तत्वावधान में विजयदत्त श्रीधर ने भारतीय पत्रकारिता के तमाम अबूझ पहलुओं की महागाथा ‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ का दस्तावेजीकरण किया है।
‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ ग्रंथ के तीन भाग हैं—पहली सदी: 1780-1880, तिलक युग : 1881-1920 और गांधी युग : 1921-1948, तीसरे भाग में आजादी के बाद प्रकाशित प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं का परिशिष्ट जोड़ा गया है। विषय की व्यापकता, तथ्यों की प्रामाणिकता तथा भारतीय भाषाओं के बीच संवेदना की एकात्मता की दृष्टि से यह अनूठा ग्रंथ है। शुक्रवार, 13 फरवरी को इसका विमोचन होगा।
भारतीय पत्रकारिता की इस महागाथा का महत्व इन सारगर्भित टिप्पणियों से समझा जा सकता है। भारतीय ज्ञान परंपरा के चिंतक, लेखक और संपादक रामबहादुर राय ने पुस्तक के बारे में कहा है कि हिन्दी में भारतीय पत्रकारिता का यह पहला संदर्भ ग्रंथ है। इसे पत्रकारिता का पुराण भी माना जा सकता है। ऐसा पुराण जिसमें कथा तो है किंतु काल्पनिकता की जगह यथार्थपरक घटनाएँ हैं।
बहुभाषाविद् मनीषी और संपादक नारायण दत्त ने कहा है कि अंग्रेजी समेत समस्त भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता का ऐसा प्रत्यक्ष परिचय देने वाली कोई और पुस्तक हिन्दी में तो निश्चित रूप से नहीं है। अन्य किसी भाषा में भी शायद नहीं है।
पूर्व कुलपति अच्युतानंद मिश्र ने कहा है कि भारतीय पत्रकारिता का इतिहास चंद अपवादों को छोड़कर अदम्य संघर्ष, बलिदान और ध्येयवादी मूल्यों से सिंचित राष्ट्रीयता का इतिहास है। तीन भागों में 245 वर्षों की पत्रकारिता के तथ्यों और प्रवृत्तियों को संकलित और विश्लेषित करना निश्चित ही एक असाधारण कार्य है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर