मप्र के आगरमालवा आएंगी ब्रिटिश मार्टिन की पौत्री शांति मैकलवर, ऐतिहासिक शिवालय बैजनाथ में करेंगी पूजा-अर्चना

13 Feb 2026 19:46:53
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आगरमालवा, 13 फरवरी (हि.स.)। ब्रिटिश छावनी के लेफ्टिनेंट रहे स्व. कर्नल मार्टिन की पौत्री शांति मैकलवर महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर शनिवार को मध्य प्रदेश के आगरमालवा आएंगी। वह आस्ट्रेलिया से आगरमालवा पहुंचेगीं और यहां स्थित प्रसिद्ध और ऐतिहासिक शिवालय बैजनाथ महादेव मंदिर में दर्शन व पूजा-अर्चना करेंगी।

शांति मैकलवर यहां दो दिन रूकेगी और रविवार को महाशिवरात्रि महोत्सव में शामिल होंगी। यह जानकारी यातायात पुलिस विभाग के अधिकारी जगदीश यादव ने शुक्रवार को दी। उन्होंने बताया कि मैडम शांति मैकलवर कर्नल मार्टिन की छठी पीढ़ी की सदस्य हैं।

गौरतलब है कि आगरमालवा स्थित इस शिवालय का जीर्णोद्धार आगरमालवा स्थित अंग्रेजों की छावनी के कर्नल मार्टिन ने अपनी पत्नी की प्रेरणा से प्रेरित होकर 1882 में सार्वजनिक चन्दा और स्वयं की धनराशि से करवाया था। उल्लेखनीय है कि पूरे हिन्दुस्तान में अंग्रेजों द्वारा निर्मित यह एकमात्र शिवालय है।

पावन बाणगंगा नदी के किनारे दो पहाड़ियों के बीच स्थित है यह शिवालसुप्रसिद्ध और प्राचीन भगवान बैजनाथ महादेव मंदिर नगर के उत्तर दिशा में जयपुर मार्ग पर दो पहाड़ियों के बीच पावन बाणगंगा नदी के किनारे स्थित है। मान्यता है कि पहले यह मंदिर एक मठ के रूप में था। सन् 1837 में काबुल (अफगानिस्तान) में युद्ध हुआ। उस समय आगरमालवा छावनी स्थित अंग्रेज फौज काबुल गई हुई थी। इस युद्ध का संचालन आगरमालवा स्थित ब्रिटिश छावनी के लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन को सौंपा गया। युद्ध होते कई दिन बीत गये। लेकिन कर्नल मार्टिन की कोई खबर नहीं आई, जिससे कर्नल मार्टिन की पत्नी लेडी मार्टिन काफी चिंतित हो रही थी। एक बार घूमते घूमते लेडी मार्टिन श्री बैजनाथ महादेव के मंदिर पहुँचीं। उन्होंने पूजापाठ कर रहे ब्राह्मणों से चर्चा कर अपने पति के विषय में बताया और मंदिर में संकल्प लिया कि यदि उनके पति युद्ध जीतकर आ जाएं तो वह मंदिर में शिखर बंद बनवाएंगी। भगवान बैजनाथ की कृपा से कर्नल मार्टिन युद्ध जीतकर आ गए। उन्होंने युद्ध में हुए चमत्कार को देख और अपनी पत्नी की प्रेरणा से प्रेरित होकर वर्ष 1882 में कर्नल मार्टिन ने सार्वजनिक चन्दा और स्वयं की राशि से इस कलात्मक मंदिर का निर्माण करवाया।

यह मंदिर द्रविडियन कला का सुन्दर मिश्रण हैमंदिर के शिखर की बनावट में उत्तर भारतीय और द्रविडियन कला का सुन्दर मिश्रण है। मंदिर का गर्भ गृह चौकोर 11 गुणे 11 का है। मंदिर का निर्माण कार्य 25 माह तक चला था। इसके गर्भ गृह के मध्य में आग्नेय पाशाण की नौ इंच ऊँची और तिनेपन इंच मोटी भगवान शिवलिंग की प्रतिमा है। मंदिर का शिखर चूने का बना है तथा शिखर के मध्य और बाहर भगवान ब्रम्हा, विष्णु, महेश की प्रतिमाएं बहुत ही सुन्दर एवं दर्शनीय है। शिखरांत में आमलक और मुण्डमाल अत्यन्त सुन्दर है। भूमि से कलश तक तक मंदिर की ऊँचाई 50 फीट है। शिखर के अग्रभाग पर चार फीट ऊँचा स्वर्ण कलश है जो कि शिखर के सोन्दर्य को निखारता है।

मंदिर के सामने एक विशाल सभा मंडप है। सभा मंडप में 3 फिट लम्बी और 2 फिट ऊँची नन्दी की प्रतिमा है। नन्दी के समीप ही संगमरमर से तराशी गई श्री बैजनाथ महादेव के अनन्य भक्त श्री जयनरायणजी बापजी वकील सा. की प्रतिमा है। मंदिर के पीछे 115 गुणे 48 और 17 फीट गहरा चौकोर कमलकुण्ड है। कमलकुण्ड भी राजा नलकालीन बताया जाता है। लाखों धर्म प्रेमी नागरिक प्रतिवर्श यहां आते है और भगवान बैजनाथ महादेव की पूजा अर्चना एवं दर्शनकर अपने जीवन को सफल बनाते हैं।

बैजनाथ महादेव ने की थी लेडी मार्टिन के पति की प्राणरक्षा सन् 1879 की बात है, जब भारत में ब्रिटिश शासन था। इन्हीं दिनों अंग्रेजों ने अफगानिस्तान पर आक्रमण कर दिया था। इस युद्ध का संचालन आगरमालवा की ब्रिटिश छावनी के लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन को सौंपा गया था। मार्टिन समय-समय पर अपनी पत्नी को युद्ध क्षेत्र से कुशलता के समाचार भेजते रहते थे। युद्ध लम्बा चला और एक समय ऐसा आया कि संदेश आना भी बंद हो गये, तब लेडी मार्टिन को चिन्ता सताने लगी और वे अनेक शंका, कुशंकाओं से घिरी रहती थीं। एक दिन वह घोड़े पर बैठकर घूमने जा रही थीं कि मार्ग में बैजनाथ महादेव मंदिर से आती हुई शंख ध्वनि व मंत्रों ने उन्हें आकर्षित किया, वह घोड़ा पेड़ से बाँधकर मंदिर में गईं। यहां मंदिर में पूजा पाठ कर रहे पंडितों से चर्चा की और शिव पूजन के महत्व के बारे में पूछताछ की। ब्राह्मणों ने कहा-भगवान शिव औघडदानी हैं। अपने भक्तों के संकट वे तुरंत ही दूर करते हैं। भक्त उनसे जो भी मांगता है, वे भक्तों की इच्छा पूरी करते हैं। लेडी मार्टिन ने कहा मेरे पति युद्ध में गये हैं और कई दिनो से कोई उनका समाचार नहीं आया। इतना कहते हुए वे रो पड़ीं। फिर ब्राह्मणों के कहने पर उन्होंने लघु रूद्री अनुष्ठान आरम्भ करवाया और संकल्प लिया कि अगर उनके पति युद्ध जीतकर आ जाएं तो वह मंदिर में शिखर बंद बनवाएंगी।

लघुरूद्री की पूर्णाहुति के दिन भागता हुआ संदेशवाहक शिवमंदिर में आया और लेडी मार्टिन को संदेशवाहक ने पत्र दिया। उन्होंने घबराते-घबराते लिफाफा खोला और पढ़ने लगीं। पत्र में उनके पति ने लिखा था, जब हम युद्धरत थे तो, अचानक हमें पठानी सेना ने घेर लिया, ऐसी विषम परिस्थिति में जान बचाकर भागना मुश्किल हो गया। इतने में मैंने देखा कि युद्धभूमि में भारत के कोई एक योगी जिनकी लम्बी जटाएं एवं हाथ में तीन नोंक वाला हथियार (त्रिशुल) है, उनका त्रिशूल इतनी तेजी से घूम रहा था। पठान सैनिक उन्हें देखकर भागने लगे। उनकी कृपा से हमारी हार की घड़िंयाँ एकाएक जीत में बदल गईं। यह सब उन त्रिशूलधारी योगी के कारण ही संभव हुआ। पत्र पढ़ते हुए लेडी मार्टिन की आंखों से अविरल अश्रुधारा बहती जा रही थी। वह भगवान शिव की प्रतिमा के सम्मुख सिर रखकर प्रार्थना करते करते रो पड़ीं। कुछ दिनों बाद जब कर्नल मार्टिन आगरमालवा ब्रिटिश छावनी लोटकर आये और पत्नी को सारी बातें बताईं। अपनी पत्नी के संकल्प पर कर्नल मार्टिन ने सन् 1883 में पन्द्रह हजार रूपये का सार्वजनिक चंदा कर श्री बैजनाथ महादेव के मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया, जिसका शिलालेख आज भी आगरमालवा के इस मंदिर में लगा है।

इन्ही बातों की जानकारी लगने के बाद कर्नल मार्टिन की पौत्री, जो कि छठवीं पीढ़ी में लगती है, शनिवार को आगरमालवा आयेगी तथा महाशिवरात्रि महोत्सव में शामिल होंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / रितेश शर्मा

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