भारतीय पर्यटन की सबसे बड़ी चुनौती सही जानकारी और प्रभावी व्याख्या की कमी : संसदीय समिति

13 Feb 2026 17:36:53

नई दिल्ली, 13 फ़रवरी (हि.स.)। परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसद की स्थायी समिति ने अपने 386वें प्रतिवेदन में कहा है कि भारत के पर्यटन क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती अवसंरचना नहीं, बल्कि सही जानकारी और प्रभावी व्याख्या की कमी है। समिति का मानना है कि देश ने विश्वस्तरीय कॉरिडोर और सुविधाएं बनाई हैं, अब जरूरत प्रशिक्षित और जानकार गाइडों की है, जो भारत की विरासत को सही तरीके से समझा सके।

समिति के अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य संजय कुमार झा द्वारा शुक्रवार को प्रस्तुत इस प्रतिवेदन में पर्यटन को केवल सेवा उद्योग नहीं, बल्कि ज्ञान-आधारित पेशा बनाने की सिफारिश की गई है।

प्रमुख सिफारिशें-

पर्यटन नीति को केवल पर्यटकों की संख्या और राजस्व तक सीमित न रखकर इस बात पर ध्यान दिया जाए कि पर्यटक भारत को कितना समझते हैं और यहां से सकारात्मक अनुभव लेकर लौटते हैं या नहीं।

काशी, अयोध्या, उज्जैन और चार धाम जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति, दर्शन, वास्तुकला और इतिहास की बेहतर जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए।

प्रशिक्षित गाइड, सांस्कृतिक व्याख्याकार और डिजिटल विशेषज्ञों का एक नया पेशेवर संवर्ग बनाया जाए, जिसमें स्पष्ट करियर मार्ग और सम्मानजनक अवसर हों।

नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विश्वविद्यालयों को पर्यटन शिक्षा और शोध का केंद्र बनाया जाए। छात्रों के लिए कम से कम 24 सप्ताह का अनिवार्य फील्ड प्रशिक्षण भी हो।

पर्यटन शिक्षा में भारतीय दर्शन, संस्कृति, कला, पर्यावरण के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विदेशी भाषाएं और संकट प्रबंधन जैसे विषय जोड़े जाएं।

स्थानीय गाइड, शिल्पकार और समुदाय के अनुभवी लोगों को दंडित करने के बजाय प्रशिक्षण और प्रमाणन देकर औपचारिक व्यवस्था में शामिल किया जाए।

होमस्टे लाइसेंस देने से पहले परिवार के कम से कम एक सदस्य को स्थानीय गाइड का बुनियादी प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए, ताकि पर्यटकों को सही जानकारी मिल सके।

एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया जाए, जहां पर्यटक प्रमाणित गाइड की सीधे बुकिंग कर सकें और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो।

गाइडों के लिए आचार संहिता और सख्त अनुशासन व्यवस्था लागू की जाए। अनैतिक आचरण पर लाइसेंस निलंबन या रद्द करने का प्रावधान हो।

होटल प्रबंधन संस्थानों को अलग-अलग देशों की संस्थाओं से जोड़ा जाए। सीमावर्ती, ग्रामीण, आध्यात्मिक, वन्यजीव और मेडिकल पर्यटन जैसे नए क्षेत्रों के लिए विशेष कौशल विकास किया जाए।

समिति ने महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति और वंचित वर्गों के लिए विशेष प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति की भी सिफारिश की है। साथ ही नए बड़े निकाय बनाने के बजाय मौजूदा संस्थानों के बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है।

समिति का मानना है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता है और पर्यटन के माध्यम से इसे प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना समय की मांग है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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