सेवा तीर्थ, कर्तव्य भवन विकसित भारत की यात्रा के महत्वपूर्ण मील का पत्थर : प्रधानमंत्री

13 Feb 2026 20:03:53
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन के उद्घाटन अवसर पर


नई दिल्ली, 13 फ़रवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय का नया भवन ‘सेवा तीर्थ’ और केंद्रीय सचिवालय के ‘कर्तव्य भवन 1 एवं 2’ विकसित भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। उन्होंने कहा कि ये नए भवन नागरिक-केंद्रित शासन तथा राष्ट्रीय प्रगति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ तथा केंद्रीय सचिवालय की इमारतों ‘कर्तव्य भवन 1 और 2’ का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ये भवन भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। उन्होंने कहा, “सेवा तीर्थ, कर्तव्य भवन 1 और 2 विकसित भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। ये नागरिक-केंद्रित प्रशासन और राष्ट्र की प्रगति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं।” उन्होंने इस अवसर पर सेवा तीर्थ स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश एक नए इतिहास का निर्माण देख रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि विक्रम संवत 2082, फाल्गुन कृष्ण पक्ष, विजया एकादशी, माघ 24 और शक संवत 1947 के इस पावन अवसर, जिसे वर्तमान कैलेंडर के अनुसार 13 फरवरी के रूप में जाना जाता है, भारत की विकास यात्रा में एक नए आरंभ का साक्षी बन रहा है। शास्त्रों में विजया एकादशी का विशेष महत्व है और इस दिन लिया गया संकल्प विजय दिलाता है। विकसित भारत के संकल्प के साथ सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन में प्रवेश करना शुभ संकेत है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक से देश के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, किंतु ये भवन ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक के रूप में निर्मित किए गए थे। उन्होंने कहा कि 1905 के बंगाल विभाजन के समय कोलकाता ब्रिटिश विरोधी आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया था, जिसके बाद 1911 में अंग्रेजों ने राजधानी को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित किया और औपनिवेशिक सोच के अनुरूप इन भवनों का निर्माण कराया।

उन्होंने कहा कि रायसीना हिल्स का चयन इस उद्देश्य से किया गया था कि ये भवन अन्य सभी इमारतों से ऊपर और प्रभावशाली दिखें। इसके विपरीत सेवा तीर्थ परिसर जमीन से जुड़ा हुआ है और यह जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक है। यहां लिए जाने वाले निर्णय किसी सम्राट की इच्छा नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए होंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी के पहले क्वार्टर के पूर्ण होने के साथ यह आवश्यक है कि विकसित भारत की झलक केवल नीतियों और योजनाओं में ही नहीं, बल्कि कार्यस्थलों और भवनों में भी दिखाई दे। नई तकनीकों के तेजी से विस्तार के बीच पुरानी इमारतें अपर्याप्त हो रही थीं। उन्होंने बताया कि करीब 100 वर्ष पुरानी इमारतों में स्थान की कमी और संरचनात्मक सीमाएं थीं तथा वे भीतर से जर्जर हो रही थीं।

उन्होंने कहा कि आज भी केंद्र सरकार के कई मंत्रालय दिल्ली में 50 से अधिक स्थानों से संचालित हो रहे थे, जिन पर प्रतिवर्ष लगभग 1,500 करोड़ रुपये किराये के रूप में व्यय होते थे। प्रतिदिन हजारों कर्मचारियों के एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने-जाने में अतिरिक्त लॉजिस्टिक खर्च होता था। सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन के निर्माण से इन खर्चों में कमी आएगी, समय की बचत होगी और कार्यक्षमता बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पुराने भवन देश के इतिहास का अमर हिस्सा हैं और उन्हें ‘युगे युगेन भारत संग्रहालय’ के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी देश की विरासत से प्रेरणा ले सके। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की यात्रा में औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति आवश्यक है। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री आवास की सड़क का नाम पहले रेस कोर्स रोड था, जिसे बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया गया। राष्ट्रपति भवन तक जाने वाली सड़क, जिसे पहले राजपथ कहा जाता था, उसे कर्तव्य पथ के रूप में विकसित किया गया। शहीद सैनिकों के सम्मान में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और पुलिस बलों के सम्मान में पुलिस स्मारक का निर्माण भी इसी सोच का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नाम परिवर्तन केवल शब्दों का बदलाव नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान स्थापित करने का प्रयास है। नए संसद भवन के निर्माण के बाद पुराने भवन को ‘संविधान सदन’ की पहचान दी गई। मुगल गार्डन का नाम ‘अमृत उद्यान’ किया गया।

उन्होंने कहा कि सेवा तीर्थ केवल एक नाम नहीं, बल्कि सेवा का संकल्प है। “सेवा परमो धर्मः” की भावना ही शासन की आत्मा है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे प्रत्येक निर्णय को 140 करोड़ नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लें।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हम यहां अधिकार दिखाने नहीं आए हैं, हम यहां जिम्मेदारी निभाने आए हैं।” उन्होंने कहा कि जब शासन सेवाभाव से चलता है तो परिणाम असाधारण होते हैं और इसी भावना से करोड़ों लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं तथा देश की अर्थव्यवस्था ने नई गति प्राप्त की है।

उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकारों की भव्य इमारत कर्तव्य की नींव पर ही खड़ी होती है। विकसित भारत 2047 केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्र का संकल्प है और सेवा तीर्थ तथा कर्तव्य भवन इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और वरिष्ठ अधिकारियों सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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