जलवायु परिवर्तन की जटिलताओं को सुलझाने में है एआई की असली ताकतः घोष

14 Feb 2026 19:56:53
'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' के लिए जलवायु व एआई पर एक्सपर्ट इंगेजमेंट ग्रुप के अध्यक्ष डाॅ. अरुणाभा घोष


नई दिल्ली, 14 फ़रवरी (हि.स.)। भारत की मेजबानी में 16 से 20 फरवरी तक इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन होने जा रहा है। भारत मंडपम में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन दुनिया भर के टेक दिग्गज, आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस (एआई) के विेशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर और 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' के लिए जलवायु एवं एआई पर एक्सपर्ट इंगेजमेंट ग्रुप के अध्यक्ष डाॅ. अरुणाभा घोष ने शनिवार को यहां पत्रकारों से कहा कि

​ भारत की मेजबानी में होने जा रही 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' ग्लोबल साउथ के लिए अपनी तरह का पहला आयोजन है। यह इस बात का बड़ा संकेत है कि जलवायु जोखिमों का सबसे अधिक सामना करने वाले देश अब अगले तकनीकी परिवर्तन के नियम तय करने की शुरुआत कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की असली ताकत जटिलताओं को सुलझाने में है। जलवायु परिवर्तन एक अत्यंत जटिल और नुकसानदायक समस्या है।

डाॅ. घोष ने कहा कि जलवायु कार्यों में तेजी लाने के लिए एआई को अक्षय ऊर्जा प्रणालियों को संतुलित करने, बाढ़ के पूर्वानुमान को बेहतर बनाने और बड़े पैमाने पर कृषि में लचीलापन लाने में उपयोग किया जा सकता है। व्यापक डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के साथ, भारत के लिए एआई हमें विकास से जुड़े निर्णयों में 'क्लाइमेट इंटेलिजेंस' को सीधे तौर पर जोड़ने का अवसर देता है, लेकिन यह प्रगति सुरक्षा मानकों के साथ आनी चाहिए। डेटा सेंटर्स ऊर्जा और पानी की खपत करते हैं, जबकि इनके लिए प्रबंधन की रूपरेखा (गवर्नेंस फ्रेमवर्क) पिछड़ी हुई है। इसलिए जलवायु के लिए 'एक जिम्मेदार एआई' का अर्थ है- पर्यावरण रिपोर्टिंग में पारदर्शिता, उचित आकार के मॉडल का निर्धारण, बुनियादी ढांचे का सावधानीपूर्वक चयन और इंसानी नियंत्रण को बनाए रखना। जलवायु के लिए एआई का उपयोग हमारे विकल्पों को प्रतिबिंबित करना चाहिए। हमें सिर्फ एआई एजेंट बनाने में नहीं, बल्कि उन्हें चलाने वाली मानवीय क्षमता में भी निवेश करना होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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