
नई दिल्ली, 14 फरवरी (हि.स.)। दिल्ली स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में शनिवार को चंद्रकांता राजेश्वर धर्मार्थ ट्रस्ट ने घर वापसी: क्यों और कैसे पुस्तक का लोकार्पण किया। इस पुस्तक के लेखक दिवगंत राजेश्वर हैं।
यह कार्यक्रम सुरुचि प्रकाशन और चंद्रकांता राजेश्वर धर्मार्थ ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस दौरान, दिवंगत राजेश्वर को श्रद्धांजलि दी गई और उनके अनुकरणीय कार्यों व विचारों को याद किया गया।
इस कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अध्यक्ष संबोधन में कहा कि धर्मांतरण को रोकना है और घर वापसी को बढ़ाना है। प्राचीन समय से हिंदू समाज ने अपनी रक्षा के लिए कुछ व्यवस्थाएं की हैं। विश्व को श्रेष्ठ बनाने पर जोर दिया है। जहां धर्मांतरण तेजी से हो रहा है वहां पर विश्व हिंदू परिषद ने अपने 800 से अधिक धर्मरक्षकों की नियुक्त की है। उनके लगन और मेहनत से पिछले वर्ष में एक लाख लोगों की घर वापसी हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले पांच सालों में घरवापसी करने वालों की संख्या में वृद्धि होगी।
आलोक ने अपने धर्म के साथ-साथ अन्य धर्मों को भी समझने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मर्यादा और कानून का पालन स्वधर्म की रक्षा, इसका प्रसार, इसकी वापसी और अपना विजय अभियान, इस धर्मांतरण को रोकने और घर वापसी को तेज करने की पाठ्य पुस्तक है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय सह-प्रमुख (धर्म जागरण समन्वय विभाग) अरुण कांत ने अपने युवाओ से आग्रह किया कि धर्मांतरण को रोकने और घर वापसी के लिए हिंसा का मार्ग नहीं अपनाना है बल्कि सामने वाले की विषम परिस्थितियों को समझना, अपना सद्व्यवहार और हिंदू संस्कृति को ध्यान में रखना है। उन्होंने कहा कि बजरंग दल के युवा क्रोधरहित रहकर इस कार्य को आगे बढ़ाएं।
इस मौके पर रजीनश के परिवार के सदस्य, सुरुचि प्रकाशन के प्रबंध न्यासी रजनीश जिंदल, सामाजिक कार्यकर्ता सहित अन्य अतिथिगण मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी