
नई दिल्ली, 14 फरवरी (हि.स.)। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार ने शनिवार को कहा कि 29वां दिव्य कला मेला सिर्फ़ एक प्रदर्शनी नहीं है बल्कि यह आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण का उत्सव है।
डॉ वीरेंद्र कुमार ने यह बात आज चंडीगढ़ में प्रदर्शनी मैदान में 29वें दिव्य कला मेले का उद्घाटन के दौरान कही।
उन्होंने कहा, दिव्य कला मेला, दिव्यांग कारीगरों और उद्यमियों की प्रतिभा को सीधे देश भर के बाज़ार से जोड़कर इस जीवनदर्शन को दिखाता है।
मंत्री ने कहा कि यह मेला देश भर के दिव्यांगजनों की ज़िंदगी में आशा की नई किरण बनकर उभरा है, जो सबको साथ लेकर चलने और समान अवसर के लिए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दिखाता है।
उन्होंने कहा कि 2014 से सशक्तिकरण की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए मंत्री जी ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में असंवेदनशील शब्दावली से हटकर सम्मानजनक शब्द दिव्यांग की ओर बदलाव न केवल शब्दावली में बदलाव है, बल्कि दूरदृष्टि में भी बदलाव है। सच्चा सम्मान शब्दों से परे होता है। इसे आर्थिक शक्ति, सामाजिक समावेशन और आत्मनिर्भरता में बदलना चाहिए।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के संयुक्त सचिव राजीव शर्मा ने इस पहल के असल आर्थिक असर पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्ष में, अलग-अलग शहरों में लगाए गए दिव्य कला मेलों में 2366.43 लाख रुपये के व्यापार लेनदेन हुए हैं, जो साफ़ तौर पर बाज़ार में बढ़ती मंज़ूरी और दिव्यांग कारीगरों की बढ़ती उद्यमिता क्षमता को दिखाता है।
सचिव ने कहा कि ये मेले सिर्फ़ प्रदर्शनी नहीं हैं, बल्कि आर्थिक समावेश और आत्मनिर्भरता के मजबूत माध्यम हैं।
राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा कि भारत के सांस्कृतिक मूल्यों के हिसाब से दिव्यांगजनों को सम्मान देना ऐतिहासिक कदम है। सशक्तिकरण के साथ सम्मान भी होना चाहिए।
अब तक, देश भर में 28 जगहों पर दिव्य कला मेले लगाए जा चुके हैं, जिनमें करीब 2,362 दिव्यांग उद्यमियों ने हिस्सा लिया है। इससे कुल मिलाकर 23 करोड़ रुपये से ज़्यादा की आय हुई है। यह समावेशी उद्यमिता में बड़ी उपलब्धि है।
सरकार ने दिव्यांगजनों की उद्यमिता को और मज़बूत करने के लिए इन कोशिशों के ज़रिए 20 करोड़ रुपये से ज़्यादा के ऋण मंज़ूर किए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी