
राउरकेला, 15 फरवरी (हि.स.)। रोसन कुजूर के लिए आज का दिन यादगार बन गया, जब उन्होंने भारतीय पुरुष हॉकी टीम के लिए अपना सीनियर अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। एफआईएच पुरुष प्रो लीग 2025-26 के राउरकेला चरण में अर्जेंटीना के खिलाफ मुकाबले से पहले स्थानीय मिडफील्डर ने इसे अपने जीवन का बड़ा क्षण बताया।
रोसन ने कहा कि अपने ही राज्य में, अपने लोगों के सामने भारत की जर्सी पहनना उनके लिए गर्व की बात है। उनके मुताबिक, हॉस्टल में उनके साथ बड़े हुए लड़कों और स्थानीय युवाओं के लिए यह प्रेरणा है कि मेहनत से बड़े स्तर तक पहुंचा जा सकता है।
उनका सफर जूनियर स्तर से लगातार प्रगति का रहा है। 2019 के सब-जूनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पहचान मिलने के बाद ओडिशा नेवल टाटा हाई परफॉर्मेंस सेंटर में कोचों ने उनकी गति और बॉल कंट्रोल को देखते हुए उन्हें डिफेंस से अटैकिंग मिडफील्ड की भूमिका में ढाला, जिससे उनके खेल में तेजी से निखार आया।
हाल में हीरो हॉकी इंडिया लीग में चैंपियन टीम वेदांता कलिंगा लांसर्स के साथ खेलने का अनुभव भी उनके लिए अहम रहा। रोसन ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ खेलने से दबाव झेलने और खेल की समझ बढ़ाने में मदद मिली। उन्होंने खास तौर पर आर्थर वान डोरेन से पोजिशनिंग की बारीकियां सीखने की बात कही।
जूनियर विश्व कप में कांस्य पदक जीतने के बाद सीनियर टीम तक पहुंचने वाले रोसन मानते हैं कि यह स्तर ज्यादा प्रतिस्पर्धी है। वे मनप्रीत सिंह और पीआर श्रीजेश जैसे सीनियर खिलाड़ियों से मिले मार्गदर्शन को अहम मानते हैं, जिन्होंने उन्हें उच्च मानकों के बारे में बताया।
रोसन का कहना है कि अब हर मौके का पूरा फायदा उठाना जरूरी है, वरना दोबारा ऊपर आने में समय लग सकता है। यही सोच उन्हें खुद को साबित करने की प्रेरणा देती है।
दिलचस्प बात यह है कि 2018 में ओडिशा में हुए हॉकी विश्व कप 2018 के दौरान वे एक स्वयंसेवक के रूप में टीमों की मदद करते थे। उसी दौरान उन्होंने अमित रोहिदास जैसे खिलाड़ियों को करीब से देखा और खुद भी उस स्तर तक पहुंचने का सपना संजोया।
अब जब वह सीनियर टीम का हिस्सा बन चुके हैं, रोसन का कहना है कि वे पूरी मेहनत से टीम के लिए योगदान देना चाहते हैं और इस मौके को अपने करियर की नई शुरुआत मानते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय