सहकारिता मंत्रियों की बैठक में सहकारिता क्षेत्र को सशक्त, आधुनिक बनाने पर होगी चर्चा

युगवार्ता    16-Feb-2026
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (फाइल फोटो)


नई दिल्ली, 16 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मंगलवार, 17 फरवरी को गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों की उच्चस्तरीय ‘मंथन’ बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्री तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी भाग लेंगे।

मंत्रालय के अनुसार यह बैठक सहकारिता क्षेत्र को सशक्त, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को सदस्य-केंद्रित, आयवर्धक और आत्मनिर्भर आर्थिक इकाइयों में रूपांतरित करना है। बैठक में दो लाख नए बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। साथ ही विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के अंतर्गत आधुनिक वेयरहाउस नेटवर्क के विस्तार पर भी चर्चा होगी।

राष्ट्रीय स्तर की नवगठित सहकारी संस्थाओं- नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड, नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड में राज्यों की भूमिका और भागीदारी पर विचार-विमर्श किया जाएगा, ताकि निर्यात, जैविक खेती और गुणवत्तापूर्ण बीज आपूर्ति के क्षेत्रों में सहकारिताओं को मजबूती मिल सके।

बैठक के एजेंडे में राज्य सहकारी कानूनों में समयबद्ध सुधार, 97वें संविधान संशोधन के अनुरूप मॉडल कानून अपनाना, सहकारी चीनी मिलों की आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ाना तथा डेयरी क्षेत्र में स्थिरता और परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना शामिल है। इसके साथ ही अमूल और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन पर भी चर्चा होगी।

बैठक में दलहन और मक्का उत्पादन को प्रोत्साहन, सहकारी बैंकों की चुनौतियों का समाधान, साझा सेवा इकाई को सुदृढ़ करना, सदस्यता विस्तार अभियान, प्रभावी मीडिया एवं संचार रणनीति तथा पैक्स और रजिस्ट्रार कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण जैसे मुद्दों पर भी विचार किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस के उपयोग, मानव संसाधन विकास एवं प्रशिक्षण, तथा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी व्यापक चर्चा होगी।

‘मंथन’ बैठक से सहकारी संघवाद की भावना को और बल मिलने तथा केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय मजबूत होने की उम्मीद है, जिससे सहकारिता क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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