
भोपाल, 16 फरवरी (हि.स.)। राज्य सरकार औद्योगिक विकास को गति देने के लिए एमएसएमई आधारित वृद्धि, क्षेत्रीय समावेशिता, महिला उद्यमिता, तकनीकी उन्नयन और निवेश को जमीनी परियोजनाओं में बदलने पर विशेष ध्यान दे रही है। हमारा यह स्पष्ट मानना है कि छोटे और मध्यम उद्योग ही राज्य की आर्थिक मजबूती का आधार बन सकते हैं। यह कहना रहा, सोमवार को भोपाल में ऑर्गेनाइजर वीकली द्वारा आयोजित अभ्युदय लीडरशिप कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश के एमएसएमई मंत्री चेतन्य कुमार कश्यप का।
दरअसल वे राज्य की औद्योगिक रणनीति और एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त बनाने के प्रयासों पर विस्तार से ऑर्गेनाइजर वीकली के वरिष्ठ संवाददाता निशांत कुमार आजाद के साथ सीधी चर्चा कर रहे थे। इस संवाद में उद्योग, निवेश और रोजगार सृजन को लेकर सरकार की दीर्घकालिक योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। भोपाल में आयोजित इस कॉन्क्लेव में प्रदेश भर से एमएसएमई एवं अन्य नीति निर्माता, उद्योग प्रतिनिधि, उद्यमी और विभिन्न क्षेत्रों के हितधारक शामिल हुए। ऑर्गेनाइजर ने चर्चा का संचालन करते हुए प्रदेश के औद्योगिक विकास और संभावनाओं पर गहन विमर्श कराया। वहीं, प्रदेश के गणमान्य उद्योगपतियों, वरिष्ठ जनों के प्रश्नों के उत्तर एवं उनके सुझावों पर प्रदेश सरकार द्वारा गंभीरता से लेने का विश्वास भी मंच से व्यक्त किया गया।
‘बीमार राज्य’ की छवि से विकास की ओर
चर्चा के दौरान इस बात पर भी विचार हुआ कि किस तरह मध्यप्रदेश ने पिछली दो दशकों में अपनी छवि बदलते हुए विकास के कई मानकों पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में जगह बनाई है। मंत्री ने कहा कि पहले कृषि, पर्यावरण और सामाजिक क्षेत्रों पर अधिक ध्यान था, जबकि वर्तमान में मोहन यादव के नेतृत्व में औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उद्योग पर बढ़ते फोकस को लेकर मंत्री कश्यप ने कहा कि पिछले वर्षों में सिंचाई क्षेत्र में बड़े निवेश से सिंचित क्षेत्र 6–7 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 45 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया है। अब राज्य की अर्थव्यवस्था को संतुलित बनाने के लिए औद्योगिक विकास को गति देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि कृषि का योगदान लगभग 40 प्रतिशत है, जबकि उद्योग का योगदान करीब 19–20 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि नरेन्द्र मोदी द्वारा एमएसएमई को देश की विकास रीढ़ बताने के दृष्टिकोण के अनुरूप राज्य ने 2025 को ‘उद्योग और रोजगार वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। क्षेत्रीय औद्योगिक सम्मेलन आयोजित कर बड़े निवेशकों, स्थानीय उद्यमियों और युवाओं को एक मंच पर लाया जा रहा है।
महिला उद्यमिता को मिल रहा प्रोत्साहन
एमएसएमई क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों को औद्योगिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। महिला उद्यमियों को डिजिटल बाजार से जोड़ने के लिए उन्हें ओएनडीसी, अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफार्मों पर लाने की पहल की जा रही है। इसके साथ ही नई एमएसएमई प्रोत्साहन नीति के तहत महिला उद्यमियों को 40 प्रतिशत की बजाय 48 प्रतिशत तक पूंजी सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है। भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र में महिला उद्योगों के लिए समर्पित औद्योगिक स्थान विकसित करने की योजना है। साथ ही प्रशिक्षण केंद्र और सहायता तंत्र भी स्थापित किए जा रहे हैं।
बड़े शहरों से गांवों तक उद्योग विस्तार
मंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। सरकार ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का निर्णय लिया है, जिसमें मंडला, दिंडोरी और बेतूल जैसे आदिवासी जिलों को भी शामिल किया गया है। छोटे भूखंड और स्थानीय जरूरतों के अनुसार बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा।
पारंपरिक उद्योगों को नया सहारा
मंत्री चेतन्य कश्यप ने कहा कि प्रदेश में लगातार खिलौना निर्माण, शिल्पकला और अन्य पारंपरिक उद्योगों को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। समूह आधारित विकास, साझा सुविधाएं और औद्योगिक शेड उपलब्ध कराकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, क्षेत्रीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए ‘एक जिला एक उत्पाद’ जैसी पहल को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुरैना की गजक, रतलाम का सेव और चंदेरी के वस्त्र जैसे उत्पादों को जीआई टैगिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से बढ़ावा दिया जा रहा है।
विकसित भारत में एमएसएमई की भूमिका
मंत्री कश्यप ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में एमएसएमई क्षेत्र अहम भूमिका निभाएगा। यह क्षेत्र रोजगार सृजन, वित्तीय समावेशन और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा। ऋण गारंटी और बिल डिस्काउंटिंग जैसे तंत्र छोटे उद्योगों को पूंजी तक पहुंच दिलाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाना जरूरी है। राज्य की एमएसएमई नीति में तकनीकी उन्नयन के लिए 15 लाख रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति डेटा सेंटर और सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी अनुकूल है।
निवेश प्रस्तावों से जमीन पर प्रगति
मंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन या क्रियान्वयन शुरू हुआ है। 13 औद्योगिक क्षेत्रों में 1,200 भूखंड उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें से लगभग 100 उद्यमियों ने जमीन खरीद ली है।
स्टार्टअप संस्कृति को मिल रहा विस्तार
राज्य में अब 4,300 से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप सक्रिय हैं। जिला स्तर पर उद्यमिता गतिविधियों को बढ़ावा देकर स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने का प्रयास किया जा रहा है। संवाद के दौरान अपशिष्ट प्रबंधन, निर्यात परीक्षण सुविधाओं और जनजातीय उद्यमिता पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने बताया कि पुनर्चक्रण को उद्योग के रूप में मान्यता दी गई है और आदिवासी क्षेत्रों में इनक्यूबेशन व साझा सुविधा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
शिक्षा और उद्योग को जोड़ने की पहल
मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कॉलेजों, आईटीआई और जिला स्तर पर नवाचार व इनक्यूबेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य छात्रों के विचारों को वास्तविक उत्पादों में बदलना और उन्हें बाजार से जोड़ना है। इसके साथ ही उद्योग बंद होने की चिंताओं पर स्पष्टीकरण भी मंत्री द्वारा यहां दिया गया। उन्होंने बताया कि उद्योगों के बंद होने को लेकर उठे सवालों पर मंत्री ने कहा कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वास्तविक बंद होने की दर एक प्रतिशत से भी कम है। कई बार पुनर्गठन, नाम परिवर्तन या पुनः पंजीकरण को बंद होना समझ लिया जाता है। सरकार संघर्षरत इकाइयों को पुनः शुरू करने में भी सहायता कर रही है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी