अपनत्व और आत्मीय संबंधों से निर्मित जीवंत व्यवस्था है कुटुंब : सरसंघचालक

युगवार्ता    16-Feb-2026
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संघ शताब्दी वर्ष में गोरखपुर में भव्य ‘कुटुंब स्नेह मिलन’ आयोजित


संघ शताब्दी वर्ष में गोरखपुर में भव्य ‘कुटुंब स्नेह मिलन’ आयोजित


संघ शताब्दी वर्ष में गोरखपुर में भव्य ‘कुटुंब स्नेह मिलन’ आयोजित


गोरखपुर, 16 फ़रवरी (हि.स.)। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरखपुर विभाग द्वारा तारामंडल स्थित बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में कुटुंब स्नेह मिलन कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गोरखपुर महानगर के 20 नगरों, चौरी-चौरा तथा गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्र के जिला स्तरीय कार्यकर्ता, नगर, जिला, विभाग एवं प्रांत कार्यकारिणी के पदाधिकारी, प्रवासी कार्यकर्ता तथा उनके परिवारजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि कुटुंब केवल एक छत और चारदीवारी का नाम नहीं है, बल्कि अपनत्व और आत्मीय संबंधों से निर्मित जीवंत व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि परिवार ही वह इकाई है जहाँ से सामाजिकता, संस्कार और कर्तव्यबोध का आरंभ होता है। अगली पीढ़ी को सामाजिक और संस्कारित बनाने की जिम्मेदारी कुटुंब निभाता है।

उन्होंने भारतीय परिवार व्यवस्था की विशेषता बताते हुए कहा कि भारत में संबंध अपनेपन पर आधारित होते हैं, जबकि पश्चिम में संबंध प्रायः सौदे पर आधारित माने जाते हैं। “हम विवाह को कर्तव्य मानते हैं, करार नहीं,” यह कहते हुए उन्होंने परिवार को राष्ट्र जीवन की आधारशिला बताया।

डॉ. भागवत ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का उल्लेख करते हुए कहा कि जब राष्ट्रहित में स्वर्ण दान का आह्वान किया गया, तब परिवारों ने स्वेच्छा से अपना योगदान दिया। यह भारतीय कुटुंब व्यवस्था की शक्ति का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि सामाजिक शिक्षा, आर्थिक गतिविधियों और संस्कृति के पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरण का केंद्र कुटुंब ही है। परिवार में माता की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि वही पीढ़ियों का निर्माण करती हैं और वहीं से ‘भारत माता’ की भावना सुदृढ़ होती है।

उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ को आचरण में उतारने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वयंसेवक को समाज से पांच कदम आगे रहना चाहिए। वर्ष में दो-तीन बार छोटे स्तर पर कुटुंब मिलन आयोजित कर संवाद और विचार-विमर्श की परंपरा को मजबूत करने पर भी बल दिया।

पर्यावरण संरक्षण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत घर से होनी चाहिए—पानी बचाना, प्लास्टिक का त्याग और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना आवश्यक है। साथ ही भाषा, भूषा, भवन, भोजन और भजन में स्वदेशी भाव अपनाने का आग्रह किया। घर में मातृभाषा के प्रयोग, पारंपरिक वेशभूषा तथा स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को उन्होंने भारतीयता का आधार बताया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ तथा समापन भारत माता की आरती के साथ संपन्न हुआ। मंच पर प्रांत संघचालक डॉ. महेंद्र अग्रवाल एवं विभाग संघचालक शेषनाथ भी उपस्थित रहे। विभाग कार्यवाह संजय ने अतिथियों का परिचय कराया।

कार्यक्रम के माध्यम से पारिवारिक सुदृढ़ता, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण का सशक्त संदेश दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

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