दिल्ली में तीन दिवसीय 'आदि रंग महोत्सव 2026' का भव्य आगाज

युगवार्ता    17-Feb-2026
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आदि रंग महोत्सव 2026'


नई दिल्ली, 17 फरवरी (हि.स.)। दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में चल रहे 'भारत रंग महोत्सव 2026' के तहत मंगलवार को तीन दिवसीय 'आदि रंग महोत्सव 2026' का भव्य आगाज किया गया।

एनएसडी की ओर से आयोजित यह महोत्सव जनजातीय कला और संस्कृति को समर्पित है। इस महोत्सव का उद्देश्य देश की समृद्ध जनजातीय विरासत को आधुनिक रंगमंच के मंच पर लाना है। यह 17-19 फरवरी तक चलेगा।

आदि-रंग के उद्घाटन समारोह में एनएसडी निदेशक चित्तारंजन त्रिपाठी ने कहा कि यह महोत्सव देशभर में 54 स्थलों पर आयोजित किया जा रहा है। इसे न्यूज़ीलैंड, कनाडा और क़तर जैसे देशों में भी प्रस्तुत किया गया है, जहां भारतीय प्रवासी समुदाय ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में भारतीय वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका में इस राष्ट्रीय गीत का भावपूर्ण गायन कर गीता में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद की आत्मा को दर्शाया।

उन्होंने कहा, “थिएटर को विविधतापूर्ण बनाना हमारा संस्थागत सामाजिक दायित्व है।

इस मौके पर गोवा के कला अकादमी के अध्यक्ष चंद्रकांत कवलेकर, लेखक एवं संस्कृति विशेषज्ञ चारुदत्त पाणिग्रही, एनएसडी के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी और रजिस्ट्रार प्रदीप कुमार मोहंती सहित अन्य कलाप्रेमी गणमान्य जन मौजूद रहे।

आदि-रंग श्रेणी के अंतर्गत “धरती आबा” जिसे हृषिकेश सुलभ ने लिखा और सुशांत नायक ने निर्देशित किया, कला अकादमी द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके अलावा ओडिशा छत्तीसगढ़ आंध्र प्रदेश गुजरात और मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से धप नृत्य मयूरभंज छाऊ ककसर धीमसा सिद्धी धमाल कर्मा सैला तथा बी डांस जैसे जनजातीय लोक-नृत्यों का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

इस दौरान “विभाजन विभीषिका तमस”नाटक प्रस्तुत किया गया, जो भीष्म साहनी के प्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित है।

एक अन्य नाटक “मालती माधवम्” एनएसडी वाराणसी केंद्र द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसे भवभूति ने लिखा और विवेक इम्मनेनी ने निर्देशित किया। “गुरुदक्षिणा”, लेखक मन्जुनाथ भगवत होस्तोटा और निर्देशक गुरु बणंगे संजीव सुवर्णा, एनएसडी के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत की गई, जिसमें कन्नड़ साहित्य की समृद्ध परंपरा झलकी।

महोत्सव की प्रस्तुतियां आगे “सखा” के साथ जारी रहीं, जिसे कश्यप कमल ने लिखा और निर्देशित किया तथा दिल्ली के अछिंजल समूह ने मंचित किया। मैथिली भाषा की इस प्रस्तुति में भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक संवेदना दिखाई दी।

जश्न-ए-बचपन खंड के अंतर्गत “रंग राख”, जिसे छत्रपति सिंह ने रूपांतरित किया और रिकेन नगोंग्ले ने निर्देशित किया।

बांग्ला नाटक “राम बाबू”, लेखक-निर्देशक मनोज कुमार साहा (अबीर) और प्रस्तुति नयाबाद तितास द्वारा, दिन की प्रस्तुतियों में प्रादेशिक रंग का सशक्त समावेश रहा।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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