सामाजिक समरसता भाषण से नहीं आचरण व व्यवहार से आएगी : डॉ मोहन भागवत

युगवार्ता    17-Feb-2026
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कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ मोहन भागवत


कार्यक्रम में उपस्थित जन


सभी हिन्दुओं के लिए खुले हों मन्दिर, कुआं और श्मशान

लखनऊ, 17 फरवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने कहा है कि मन्दिर कुआं और श्मशान सभी हिन्दुओं के लिए खुले होने चाहिए और उनमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। सरसंघचालक ने कहा कि सामाजिक समरसता के लिए व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर प्रयास होने चाहिए। संघ सारे हिन्दू समाज को एक मानता है। इसलिए हमें व्यक्तिगत स्तर पर और पारिवारिक स्तर पर आपसी मेलजोल बढ़ाना चाहिए। सामाजिक समरसता भाषण से नहीं बल्कि आचरण व व्यवहार करने से आएगी। संघ के कुटुम्ब में जात-पात नहीं है। ऐसा ही समाज में करना होगा। सरसंघचालक ने कहा कि संघ पुस्तकें पढ़ने की अपेक्षा स्वयंसेवक को देखने से अधिक समझ में आता है। सरसंघचालक निराला नगर स्थित सरस्वती विद्या मन्दिर के माधव सभागार में कार्यकर्ता कुटुम्ब मिलन कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे।

उन्होंने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि हमें अपने बच्चों को बताना होगा कि करियर क्या है? पेट भरना, ज्यादा कमाना, उपभोग करना करियर नहीं है। करियर कमाने से ज्यादा बाँटने में है। बच्चों को ऐसी शिक्षा दें जो अमीर होकर दान दें, दूसरों के लिए जीना सीखें। घरों में ऐसे संस्कार देने होंगे जिनके अनुसार बच्चे यह समझें कि हमारा हित ही देश के साथ है। मेरे लिए मेरा देश ही पहले है। विद्या और धन अपने देश के लिए कमाना चाहिए

सारे हिन्दू समाज को एक मानता है संघ

सरसंघचालक ने कहा कि समाज की इकाई व्यक्ति नहीं परिवार है। सामाजिक व्यवहार का परीक्षण परिवार में होता है। बचत करना हमारे परिवारों की आदत में है। देश का धन हमारे घरों में रहता है। हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चों को मातृभाषा ठीक से आए। हमारे अन्दर देशभक्ति, प्रमाणिकता, अनुशासन और कुटुम्ब गौरव का भाव होना चाहिए।

बस्ती और शाखा में हो कुटुम्ब मिलन

डॉ मोहन भागवत ने कहा कि 100 से 70 की संख्या में कुटुम्ब मिलन बस्ती और शाखा स्तर पर होना चाहिए। हमें अभाव में नहीं रहना है लेकिन किसी के प्रभाव में भी नहीं आना है। जैसा संघ है वैसा ही हमारा जीवन होना चाहिए। पंच परिवर्तन कार्यक्रमों में मातृशक्ति की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है।

हिन्दुस्थान हिन्दू राष्ट्र है

सरसंचालक ने अपने उद्बोधन में आगे कहा कि हिन्दुस्थान हिन्दू राष्ट्र है, हम सभी हिन्दू अपने सहोदर हैं। समाज में जो भी वर्ग संघ के निकट नहीं है, संघ कार्यकर्ताओं को उनके निकट जाना चाहिए। उनसे आत्मीयतापूर्ण सम्बन्ध विकसित करने चाहिए। वह सम्बन्ध चौराहे से शुरू होकर कुटुम्ब तक विस्तृत हों। सब अपने हैं, हमें यह मानकर व्यवहार करना है।

स्क्रीन का समय निश्चित हो

सरसंघचालक ने कहा कि हम तकनीक को नहीं रोक सकते लेकिन इसका उपयोग अनुशासन में रहकर हो। कितने समय तक क्या देखना है यह निर्धारित होना चाहिए। विज्ञान एआई, टीवी, मोबाइल और फिल्मों की हानियाँ भी बताता है। नई पीढ़ी को यह सब बताना चाहिए।

संघ चिरतरुण संगठन

सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि आज भारतीय ज्ञान परम्परा को सभी जगह माना जाता है। यह विषय हमें अपने बच्चों को बताना चाहिए। तब उन्हें समझ में आएगा कि हम क्या हैं। उन्होंने आगे कहा कि संघ चिरतरुण संगठन है और भारत के सबसे अधिक युवा संघ के पास हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

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