सरकार अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा और उनके समग्र विकास के लिए प्रतिबद्धः जुअल ओराम

युगवार्ता    19-Feb-2026
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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के स्थापना दिवस के मौके पर केन्द्रीय मंत्री


-केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुअल ओराम ने “एनसीएसटी हैंडबुक” का विमोचन किया

नई दिल्ली, 19 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुअल ओराम ने कहा कि सरकार अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा और उनके समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गुरुवार को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) के 23वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जुअल ओराम ने आयोग की सक्रिय भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि आयोग की सिफारिशों और क्षेत्रीय दौरों से नीतिनिर्माण प्रक्रिया को सशक्त आधार मिला है। मंत्री ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, वनाधिकार और आधारभूत संरचना के क्षेत्रों में निरंतर एवं समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। सिविल सर्विसेज़ ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट में आयोजित कार्यक्रम में जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइकेय, एनसीएसटी के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य, सदस्य निरुपपम चकमा, आशा लकरा सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

इस अवसर पर जुअल ओराम ने “एनसीएसटी हैंडबुक” का विमोचन किया, जिसमें आयोग की कार्यप्रणाली एवं जिम्मेदारियों का विवरण दिया गया है। साथ ही जुलाई से दिसंबर 2025 की अवधि में आयोग की गतिविधियों को दर्शाने वाली एक पत्रिका भी जारी की गई। जनजातीय सशक्तिकरण से संबंधित आयोग की उल्लेखनीय उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया गया। समारोह के अंतर्गत जनजातीय अधिकारों पर आधारित एक नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर अपने वक्तव्य में दुर्गा दास उइकेय ने जनजातीय समुदायों को कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ सुनिश्चित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आयोग और मंत्रालय के बीच समन्वय से शिकायत निवारण तंत्र मजबूत हुआ है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अत्याचार से संबंधित शिकायतों में कमी आई है और जनजातीय समुदाय अब विकासात्मक मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

आयोग की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने कहा कि एनसीएसटी अपने संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में सक्रिय एवं सतर्क है। उन्होंने बताया कि राज्यों के साथ नियमित संवाद, अनुसूचित क्षेत्रों के दौरे तथा शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण आयोग की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने जनजातीय परंपराओं, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ मुख्यधारा के विकास में उनकी सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने विशेष रूप से जनजातीय बालिकाओं की शिक्षा और कौशल विकास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय नेतृत्व को सशक्त करने से विकास कार्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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