भारत में स्थायी चुम्बक का उत्‍पादन इस साल के अंत तक होगा शुरू : किशन रेड्डी

19 Feb 2026 19:09:53
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी


नई दिल्‍ली, 19 फरवरी (हि.स)। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने गुरुवार को कहा कि भारत में इस साल के आखिरी तक दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक (आरईपीएम) का उत्पादन शुरू हो जाएगा, जो इलेक्ट्रिक वाहन एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों के लिए जरूरी महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम होगा।

जी. किशन रेड्डी ने यहां उद्योग मंडल इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (फिक्की) और खान मंत्रालय की ओर से आयोजित सम्मेलन में कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत केंद्र सरकार दु्र्लभ पृथ्वी तत्वों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस क्रम में इसी साल भारत में स्थायी चुंबकों का उत्पादन शुरू हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि भारत अपने सामरिक और आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ग्लोबल जरूरी खनिज बैंकिंग में खुद को एक आकर्षक गंतव्य के तौर पर स्थापित कर रहा है। रेड्डी ने बताया कि भारत अभी जरूरी खनिजों के आयात पर 95 फीसदी निर्भर है। उन्‍होंने कहा कि राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के तहत 32,000 करोड़ रुपये के खर्च से काम शुरू हो गया है। रेड्डी ने बताया कि पूरे देश में 4,000 से अधिक क्रिटिकल खनिज अन्वेषण गतिविधियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं। उन्होंने आगे कहा कि सेक्टर को और बढ़ावा देने के लिए सरकार राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट को सपोर्ट कर रही है।

रेड्डी ने कहा कि गुजरात सरकार ने इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया है, जबकि आंध्र प्रदेश भी आगे बढ़ने को तैयार है। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही ओडिशा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों से भी इन संयंत्रों की स्थापना पर चर्चा करेंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि पूर्ण मूल्य संवर्धन शृंखला विकसित नहीं की गई तो भारत प्रसंस्कृत महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अन्य देशों पर निर्भर बना रहेगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खान मंत्रालय ने इसके लिए अन्वेषण ब्लॉकों की नीलामी करने के साथ पुनर्चक्रण सुविधाओं को भी मंजूरी दी है। फिलहाल भारत में महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए पर्याप्त इकाइयों की कमी है और यह एक बड़ी चुनौती है। इसके समाधान के लिए सरकार आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र और गुजरात में महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण संयंत्र पार्क स्थापित करने की तैयारी में है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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