भारत के हाथों में 16 साल बाद फिर आई हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी की कमान

20 Feb 2026 19:53:53
हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी


- कॉन्क्लेव में 33 देशों के नौसेना प्रमुख और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख शामिल हुए

नई दिल्ली, 20 फरवरी (हि.स.)। भारतीय नौसेना को 16 साल बाद फिर से हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (आईओएनएस) की कमान मिल गई है। भारत ने आज ही विशाखापट्टनम में हिंद महासागर नौसैनिक संगोष्ठी के प्रमुखों के 9वें कॉन्क्लेव में रॉयल थाई नेवी से अध्यक्षता वापस ली। भारत इससे पहले 2008 से 2010 तक अध्यक्ष रहने के बाद अब फिर इस फोरम को आगे बढ़ाएगा, जो पेशेवर समुद्री सहयोग के लिए एक सेंट्रल प्लेटफॉर्म बन गया है। इस कॉन्क्लेव में 33 देशों के नौसेना प्रमुख और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख शामिल हुए।

सम्मेलन में शामिल हुए सभी सदस्य ऑब्जर्वर और हिंद महासागर के दूसरे तटीय देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। अटलांटिक से लेकर पैसिफिक तक की भागीदारी ने हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्धता एक जैसी सोच वाली नौसेना के बढ़ते तालमेल को दिखाया। इस मौके पर नौसेना प्रमुख और आईओएनएस के अध्यक्ष एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने फंक्शनल अहमियत को मजबूत करने के लिए एक साफ और आगे की सोच बताई। इसके लिए उन्होंने समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता और आपदा राहत और इंटरऑपरेबिलिटी पर इसके वर्किंग ग्रुप्स को मजबूत करने पर जोर दिया।

कॉन्क्लेव के दौरान आईओएनएस की वेबसाइट लॉन्च की गई, जिसे भारतीय नौसेना ने सदस्य नौसेनाओं के बीच इस्तेमाल, संस्थागत निरंतरता और सुरक्षित जुड़ाव को बेहतर बनाने के लिए किया था। फिलीपींस को ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल किया गया और ओमान एचएडीआर पर आईओएनएस वर्किंग ग्रुप में शामिल हुआ, जिससे आईओएनएस के तहत मिलकर काम करने का दायरा और बढ़ा और फोरम की कोऑपरेटिव पहुंच बढ़ी।

भारत ने अपने कार्यकाल के दौरान आगे बढ़ाए जाने वाले पहलों के बारे में भी बताया। भारत की अध्यक्षता में आईओएनएस देशों के बीच समुद्री अभ्यास और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की भागीदारी के साथ सदस्य देशों में आईओएस सागर की लगातार तैनाती, परिचालन बातचीत, पेशेवर आदान-प्रदान और क्षमता बढ़ाने के मकसद से संरचित समुद्री सूचना साझाकरण कार्यशाला और संवाद आयोजित किये जाएंंगे। भारत की अध्यक्षता में आईओएनएस हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री स्थिरता के लिए मजबूत प्रतिबद्धता का संकेत देगा।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीत निगम

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