खजुराहो नृत्य समारोह हमारी राष्ट्रीय धरोहर : मुख्यमंत्री डॉ यादव

20 Feb 2026 23:03:53
52वें खजुराहो अंतरराष्ट्रीय नृत्य समारोह के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री


52वें खजुराहो अंतरराष्ट्रीय नृत्य समारोह के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री


52वें खजुराहो अंतरराष्ट्रीय नृत्य समारोह का शुभारंभ


- सात दिवसीय 52वें खजुराहो अंतरराष्ट्रीय नृत्य समारोह का भव्य शुभारंभ, मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़े

भोपाल, 20 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि खजुराहो नृत्य समारोह हमारी राष्ट्रीय धरोहर है। खजुराहो ऐसा स्थान है, जहां पत्थरों में प्राण होते हैं। खजुराहो में स्थित कंदरिया महादेव मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, वामन मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर, पार्वती मंदिर सहित देवालयों के परिवार विद्यमान हैं, जो शौर्य और रत्नों की धरती में कलाओं का संगम है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार देर शाम विश्व धरोहर स्थल खजुराहो में प्रारंभ हुए शास्त्रीय नृत्यों के सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय नृत्य समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आदि संस्कृति के साथ सनातन संस्कृति को जोड़ने की दिशा में आह्वान किया है। मध्य प्रदेश सरकार विविध कलाओं के विकास के लिये प्रतिबद्ध है। इसलिए मध्य प्रदेश के बजट में संस्कृति विभाग की गतिविधियों के लिये भी राशि में वृद्धि की गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खजुराहो नृत्य समारोह में पधारे शीर्ष नृत्य कलाकारों और नृत्य शैलियों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि खजुराहो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय धरोहर है। इस वर्ष 52वां खजुराहो नृत्य समारोह भगवान नटराज को समर्पित किया गया है, जिसके लिए संस्कृति विभाग बधाई का पात्र है। खजुराहो नृत्य समारोह का आयोजन भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को देव नटेश भगवान शिव से जोड़ने का यह अनूठा प्रयास है। मध्य प्रदेश में पधारने वाले कला साधक पुन: यहां आना चाहते हैं।

शुभारंभ अवसर पर प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (राज्यमंत्री) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी और खजुराहो सांसद वीडी शर्मा सहित अन्य उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने चार पुस्तकों का विमोचन भी किया। इन पुस्तकों में नटराज- भगवान शिव के नृत्य मुद्रा के करण, खजुराहो एवं नृत्य समारोह केंद्रित कॉफी टेबल बुक, बुंदेली- इतिहास, संस्कृति और गौरव, बुन्देलखण्ड-मध्य प्रदेश की अमूल्य विरासत सम्मिलित है।

उल्लेखनीय है कि संस्कृति विभाग एवं उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर, मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग एवं छतरपुर जिला प्रशासन के सहयोग से सात दिवसीय प्रतिष्ठापूर्ण समारोह का आयोजन किया जा रहा है। समारोह के शुभारंभ अवसर पर अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला, संस्कृति संचालक एनपी नामदेव, छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल एवं उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर भी उपस्थित रहे।

समारोह में शुभारंभ दिवस पर पहली प्रस्तुति संगीत नाटक अकादमी अवॉर्डी मैत्रेयी पहाड़ी एवं साथी, दिल्ली द्वारा कथक नृत्य की हुई। सुविख्यात नृत्यांगना एवं कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी ने ''प्रतिष्ठा: शाश्वत तत्वों का आह्वान'' नृत्यनाटिका की प्रस्तुति दी। यह आह्वान पंचतत्व- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश-को समर्पित है, वही शक्तियां जो जीवन और सृष्टि को धारण करती हैं। मृदुल गतियों और भावपूर्ण अभिव्यक्ति के माध्यम से नर्तक- नृत्यांगनाएं इन शाश्वत तत्वों को साकार करते हैं, जो संतुलन, ऊर्जा और सामंजस्य का प्रतीक हैं। इस पवित्र आरंभ से यात्रा धीरे-धीरे भगवान कृष्ण की दिव्य उपस्थिति की ओर ले जाती है - धर्म, प्रेम और करुणा के शाश्वत पथप्रदर्शक, जो प्रत्येक तत्व और प्रत्येक हृदय में विद्यमान हैं।

स्वप्न में शिव के अनेक रूप

कथक के शास्त्र के पश्चात चेन्नई की अनुराधा वेंकटरमन ने भरतनाट्यम नृत्य प्रस्तुति का प्रारंभ मंगलाचरण से किया, जिसमें उन्होंने स्वप्न में भगवान शिव के भव्य प्रवेश का दृश्य प्रस्तुत किया। यह रचना ललगुड़ी आर. श्रीगणेश द्वारा राग हंसध्वनि और आदि ताल में संयोजित की गई है। इस प्रस्तुति में नायिका अपने स्वप्न में शिव को विभिन्न रूपों में देखती है। इस खंड के पद गोस्वामी तुलसीदास की काव्य रचनाओं से लिए गए हैं, जिन्हें दीप्थि श्रीनाथ ने संगीतबद्ध किया है।

“चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्”

अगले क्रम में भुवनेश्वर की शुभदा वरडाकर की ओडिसी नृत्य प्रस्तुति हुई। उनकी प्रस्तुति का शीर्षक अभेदम् था। जगद्गुरु आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदान्त से प्रेरितअभेदम् आचार्य आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदान्त की गहन अद्वैत दर्शन-परंपरा का अन्वेषण करता है, जो आत्मा और परमात्मा की मूलभूत एकता की उद्घोषणा करती है।

दूसरे दिन की नृत्य प्रस्तुतियां

52वां खजुराहो नृत्य समारोह में दूसरे दिन 21 फरवरी को सायं 6:30 बजे से विश्वदीप, दिल्ली का कथक, प्रभात मेहतो, झारखंड का छाऊ एवं अक्मारल काइना रोवा, कजाकिस्तान का भरतनाट्यम नृत्य होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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