(लीड) रेखा गुप्ता ने 'सीएम जनसुनवाई पोर्टल एवं मोबाइल ऐप' का किया शुभांरभ

21 Feb 2026 19:02:53
दिल्ली सचिवालय में शनिवार को ‘सीएम जनसुनवाई पोर्टल एवं मोबाइल ऐप’ शुभांरभ करती मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता


नई दिल्ली, 21 फ़रवरी (हि.स.)।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को दिल्ली सचिवालय से ‘सीएम जनसुनवाई पोर्टल एवं मोबाइल ऐप’, ‘ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल’ को कॉमन सर्विस केंद्रों (सीएससी) से जोड़ने और नए ईडब्ल्यूएस/डीजी/सीडब्ल्यूएसएन पोर्टल’ का शुभारंभ किया । इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इनका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को पारदर्शी, सुलभ और भ्रष्टाचार मुक्त बनाकर दिल्ली के नागरिकों को सशक्त बनाना है।

इस मौके पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद, सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह, वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने ‘सीएम जनसुनवाई पोर्टल व ऐप’ के बारे में बताया कि यह पोर्टल एक एकीकृत मंच के रूप में कार्य करेगा। इसी एक मंच पर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार के सभी विभागों से जुड़ी शिकायतें दर्ज की जा सकेंगी। इसकी कार्यप्रणाली को बेहद सरल रखा गया है ताकि आम नागरिक बिना किसी तकनीकी परेशानी के अपनी बात कह सके। सिस्टम के भीतर शिकायतों, क्षेत्रों और विभागीय अधिकारियों की मैपिंग पहले से ही कर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने पाया कि नागरिकों के पास अपनी समस्याएं दर्ज करने के लिए तो मंच थे, लेकिन उनके समाधान की प्रभावी निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। शिकायतें एक विभाग से दूसरे विभाग में ट्रांसफर होती रहती थीं और आवेदक को यह पता ही नहीं चलता था कि समाधान कब और किस स्तर पर होगा। इसी समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल एवं मोबाइल ऐप शुरू किया गया है। इसकी विशेषता के बारे में कहा कि शिकायत दर्ज करने के लिए नागरिकों को चार माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं, ऑनलाइन पोर्टल, मोबाइल ऐप, कॉल सेंटर (1902) और मुख्यमंत्री कार्यालय के माध्यम से ऑफलाइन व्यवस्था। शिकायतों के निवारण के लिए तीन स्तरीय प्रणाली लागू की गई है, जिसमें जन शिकायत समाधान अधिकारी (जेएसएसए), अपीलीय प्राधिकार (एए) और अंतिम अपीलीय प्राधिकारी (एफएए) शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक शिकायत के लिए एक यूनिक रेफरेंस आईडी जारी की जाएगी और प्रक्रिया के हर चरण पर एसएमएस के माध्यम से अपडेट दिया जाएगा। नागरिकों को रिमाइंडर भेजने और पूर्व में की गई शिकायतों को नई शिकायत से लिंक करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। अगर समाधान से संबंधित फीडबैक नकारात्मक मिलता है तो मामला खुद ही उच्च स्तर पर एस्केलेट हो जाएगा। पूरी व्यवस्था 100 प्रतिशत फीडबैक आधारित मॉनिटरिंग पर आधारित होगी, जिससे फील्ड स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार ने फिजिकल जनसुनवाई को भी जारी रखा है। जिला स्तर तक सभी अधिकारियों को जनसुनवाई करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब नागरिक कहीं से भी अपनी समस्या दर्ज कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पोर्टल ‘सिर्फ सुनने वाली नहीं, बल्कि समय पर समाधान देने वाली सरकार’ की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि शिक्षा में पारदर्शिता और समय पर प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), वंचित समूह (डीजी), विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (सीडब्ल्यूएसएन) श्रेणी के दाखिलों के लिए एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है। पहले इस्तेमाल हो रहे पुराने और असुरक्षित सॉफ्टवेयर को हटाकर यह नया, सुरक्षित और क्लाउड आधारित सिस्टम लागू किया गया है। इसे शुरू करने से पहले इसकी पूरी तरह सुरक्षा जांच (ऑडिट) भी कराई गई, ताकि डेटा सुरक्षित रहे और प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो।

मुख्यमंत्री ने बताया कि डिजिटल डिवाइड को कम करने और लोगों तक सरकारी सेवाएं आसान तरीके से पहुंचाने के लिए सरकार ने ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाओं को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएमसी) नेटवर्क से जोड़ दिया है। अब नागरिकों को छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। दिल्ली भर में चल रहे 7,000 से अधिक सक्रिय सीएससी केंद्रों के माध्यम से लोगों को स्थानीय स्तर पर ही सेवाएं मिल सकेंगी। इस व्यवस्था के तहत आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र, सामाजिक कल्याण, खाद्य एवं आपूर्ति, श्रम तथा शिक्षा विभाग से जुड़ी लगभग 75 ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाएं उपलब्ध होंगी। हर सेवा के लिए केवल 30 रुपये का नाममात्र शुल्क तय किया गया है, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और सभी के लिए समान रूप से सुलभ रहे।

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि पहली बार दिल्ली सरकार की सभी संपत्तियों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए एसेट मैनेजमेंट पोर्टल बनाया गया है। अब जमीन और भवनों की असली स्थिति, उनकी उपलब्धता और कहीं अतिक्रमण तो नहीं है, यह सारी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर देखी जा सकती है। साथ ही ‘सीएम प्रगति’ पोर्टल के जरिए सरकार की सभी परियोजनाओं की रियल-टाइम निगरानी की जा रही है। अब हर परियोजना की मौजूदा स्थिति, मिली हुई मंजूरियां, फाइल कहां लंबित है और देरी के कारण क्या हैं, यह जानकारी सीधे मुख्यमंत्री स्तर तक उपलब्ध है। इससे काम में तेजी आएगी, लागत बढ़ने पर रोक लगेगी और जनता के पैसे की बचत होगी।

मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सरकार का पहला वर्ष पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन स्थापित करने के लिए समर्पित रहा है। समय-समय पर व्यवस्था को लेकर उठने वाले विभिन्न प्रश्नों और आरोप-प्रत्यारोपों के बीच मुख्यमंत्री के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने एनआईसी के सहयोग से ईडब्ल्यूएस, डीजी और सीडब्ल्यूएसएन श्रेणी के बच्चों के लिए एक नया डिजिटल पोर्टल तैयार किया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के संबंधित विभाग के मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में विकसित यह पोर्टल डुप्लीकेसी और किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने, बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने कहा कि सीएम जनसुनवाई पोर्टल और मोबाइल ऐप से नागरिक ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर उसकी स्थिति ट्रैक कर सकेंगे। साथ ही साइबर क्राइसिस मैनेजमेंट प्लान लागू कर सरकारी वेबसाइटों और डेटा की सुरक्षा मजबूत की गई है। 200 से अधिक विभागों में ई-ऑफिस प्रणाली से काम पेपरलेस हो रहा है और सभी सरकारी वेबसाइटें एकीकृत प्लेटफॉर्म पर लाई गई हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

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