खेल का मैदान सार्वजनिक जीवन की प्रमुख पाठशाला : विजेंद्र गुप्ता

21 Feb 2026 20:14:53
दिल्ली विश्वविद्यालय के शहीद भगत सिंह कॉलेज के शैक्षणिक सभागार में ‘चुनौतियां और अवसर : एक आर्थिक परिप्रेक्ष्य’ विषय पर आयोजित तीसरे राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता


नई दिल्ली, 21 फ़रवरी (हि.स.)। ‘खेल में जीत टीम की होती है लेकिन राजनीति में सच्ची जीत जनता की होनी चाहिए’ यह विचार दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शनिवार को पुणे में तीन दिवसीय 15वें भारतीय छात्र संसद के उद्घाटन भाषण के दौरान व्यक्त किए। स्टेडियम से स्टेट्समैनशिप तक: राजनीति खेलों से क्या सीख सकती है? विषय पर बोलते हुए, गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि खेल का मैदान सार्वजनिक जीवन के लिए एक प्रमुख पाठशाला है। उन्होंने कहा कि जिस तरह एक एथलीट तिरंगे का मान बढ़ाने के लिए पसीना बहाता है, उसी तरह एक जन प्रतिनिधि को निःस्वार्थ भाव से काम करना चाहिए ताकि राष्ट्र की गरिमा अडिग रहे।

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि खेल की भावना आधुनिक राजनीति को तीन स्तंभों के माध्यम से 'संजीवनी' प्रदान करती है: अनुशासन, टीम वर्क और खेल भावना। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में संविधान ही अंतिम 'रूलबुक' है, ठीक वैसे ही जैसे खेल के नियम होते हैं। उन्होंने युवा नेताओं से आग्रह किया कि वे राजनीतिक विरोधियों को शत्रु नहीं बल्कि प्रतिस्पर्धी के रूप में देखें। उन्होंने जोर देकर कहा कि हार को शालीनता से स्वीकार करना और विजेता का सम्मान करना एक प्रगतिशील समाज की आत्मा है। उन्होंने कहा कि एक कप्तान की परीक्षा संकट में होती है; उसी तरह, एक नेता की असली पहचान तब होती है जब देश किसी चुनौती का सामना कर रहा हो।

भविष्य के रोडमैप पर प्रकाश डालते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि विकसित भारत @2047 का लक्ष्य तभी प्राप्त किया जा सकता है जब युवा अपनी ईमानदारी और फोकस को सत्ता के गलियारों में लाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित भारत के लिए एक ऐसी राजनीतिक संस्कृति की आवश्यकता है जहां योग्यता ही एकमात्र पैमाना हो और जहां जोड़-तोड़ की जगह समर्पण हो।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि धर्म, जाति और क्षेत्र की बाधाओं को तोड़कर एक राष्ट्रीय टीम के रूप में काम करने से भारत हर क्षेत्र में विश्व नेता के रूप में वैश्विक मंच पर खड़ा होने के लिए तैयार है।

विजेंद्र गुप्ता ने छात्रों के समूह से आग्रह किया कि वे असफलताओं को अपने जीवन में पूर्ण विराम नहीं बल्कि अल्पविराम के समान मानें, जो तकनीक को सुधारने और मजबूती से वापसी करने का एक अवसर है। उन्होंने भारतीय छात्र संसद की सराहना करते हुए कहा कि यह एक ऐसा मंच प्रदान करता है जो चरित्र और अखंडता का निर्माण करता है, जो एक मजबूत राष्ट्र की पहचान है। उन्होंने दोहराया कि जब नेता अपने लिए खेलना बंद कर देंगे और राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना शुरू करेंगे, तो वैश्विक चैंपियन बनने की भारत की यात्रा निश्चित पूरी हो जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

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