सरकार-उद्योग-समाज के समन्वय से ही होगा रूपांतरण: उपराष्ट्रपति

21 Feb 2026 16:36:53
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन शनिवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए


नई दिल्ली, 21 फ़रवरी (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा है कि देश के समग्र रूपांतरण के लिए सरकार, उद्योग और समाज के बीच सशक्त समन्वय अनिवार्य है तथा यही विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने का आधार बनेगा।

उपराष्ट्रपति शनिवार को यहां भारत मंडपम में एक मीडिया ग्रुप के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा के इस परिवर्तनकारी दौर में ऐसा सहयोग और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने पिछले एक दशक में देश की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत विश्व की दसवीं अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और तीसरे स्थान की ओर अग्रसर है। संरचनात्मक सुधारों, समावेशी विकास, डिजिटल संपर्क, वित्तीय समावेशन और आधारभूत ढांचे के विस्तार से 25 करोड़ से अधिक नागरिक अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं और देशभर में नई आकांक्षाएं जगी हैं।

उन्होंने कहा कि विकास के अगले चरण में सरकार, उद्योग और नागरिक समाज के बीच गहन साझेदारी की आवश्यकता है। उनके अनुसार कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) अब परिधि का विषय नहीं बल्कि राष्ट्रीय प्रगति का केंद्रीय स्तंभ बन चुका है, जहां उद्यम और संवेदना का संगम होता है।

‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत @ 2047’ के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विकास व्यापक, समावेशी और टिकाऊ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीएसआर के माध्यम से सार्वजनिक शिक्षा को सुदृढ़ किया जा सकता है, दूरदराज क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा सकता है, उद्योग-संरेखित कौशल विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है, महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को समर्थन दिया जा सकता है तथा नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु अनुकूल पहल के जरिए हरित परिवर्तन को गति दी जा सकती है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सीएसआर केवल कानून के अनुपालन का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। नीतिगत सुधारों जैसे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, डिजिटल शासन और जीएसटी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन कदमों से व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास मजबूत हुआ है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल नीतियां किसी राष्ट्र का कायाकल्प नहीं कर सकतीं, बल्कि वास्तविक परिवर्तन तब होता है जब सरकार, उद्योग और समाज एक दिशा में आगे बढ़ें।

उपराष्ट्रपति ने जिम्मेदार पूंजीवाद विषय पर कहा कि लाभ और उद्देश्य साथ-साथ चलने चाहिए तथा नवाचार और समावेशन, विकास और स्थिरता एक-दूसरे के पूरक बनने चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने मीडिया संगठनों से विकास से जुड़ी सकारात्मक खबरों को अधिक स्थान देने का आग्रह करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता केंद्र में रहनी चाहिए और उनकी व्यवस्था में आस्था सुदृढ़ होनी चाहिए। उन्होंने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे दीर्घकालिक नीतिगत निर्णयों को मजबूती मिल सकती है।

-----------

हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

Powered By Sangraha 9.0