नासा ने हबल स्पेस टेलीस्कोप की मदद से खोजी डार्क मैटर से बनी घोस्ट गैलेक्सी

23 Feb 2026 08:15:53
नासा से संबद्ध हबल फ्लाइट ऑपरेशन टीम के सदस्य फैथम डोनाल्ड और बिजल पटेल मिशन ऑपरेशन रूम में हबल स्पेस टेलीस्कोप को कमांड करने के बारे में चर्चा करते हुए। फोटो- नासा/गोडार्ड रेबेका रोथ


वाशिंगटन, 23 फरवरी (हि.स.)। अमेरिका की अंतरिक्ष अन्वेषण, वैमानिकी अनुसंधान और नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रमों की सरकारी एजेंसी राष्ट्रीय वैमानिकी और अंतरिक्ष प्रशासन ( नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) यानी नासा के खगोलविदों ने हबल स्पेस टेलीस्कोप की मदद से डार्क मैटर से बनी भूतिया आकाशगंगा (घोस्ट गैलेक्सी) का पता लगाया है। यह 99 प्रतिशत डार्क मैटर से बनी है। खगोलविदों का दावा है कि यह रहस्यमयी आकाशगंगा में से एक 'सीडीजी-2' है।

नासा ने इस उपलब्धि का विवरण अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है। इसमें कहा गया है कि हबल स्पेस टेलीस्कोप से ली गई इस तस्वीर में दिखाई गई कम सतह वाली गैलेक्सी सीडीजी-2 में डार्क मैटर ज्यादा है और इसमें तारों का बहुत कम बिखराव है। यह गैलेक्सी लगभग दिखाई नहीं देती, लेकिन एडवांस्ड स्टैटिस्टिकल टेक्नीक का इस्तेमाल करके वैज्ञानिकों ने तारों के छोटे समूह (ग्लोबुलर क्लस्टर) की खोज करके इसकी पहचान की।

राष्ट्रीय वैमानिकी और अंतरिक्ष प्रशासन के अनुसार, यह पृथ्वी से करीब 300 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर पर्सियस गैलेक्सी क्लस्टर में स्थित यह बेहद धुंधली आकाशगंगा सामान्य तारों से नहीं, बल्कि चार सघन ग्लोब्युलर क्लस्टर्स के जरिए पहचानी गई। शुरुआती आकलन बताते हैं कि सीडीजी-2 की कुल द्रव्यमान का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा डार्क मैटर है।

नासा के अनुसार ,आमतौर पर अधिकतर आकाशगंगा अरबों तारों की चमक से दूर-दूर तक दिखाई देती हैं, लेकिन कुछ विशेष आकाशगंगा इतनी फीकी होती हैं कि उन्हें पहचानना बेहद कठिन हो जाता है। इन्हें लो-सरफेस-ब्राइटनेस गैलेक्सी कहा जाता है। इनमें तारों की संख्या बहुत कम होती है और इनका अधिकांश द्रव्यमान डार्क मैटर से बना होता है, ऐसा पदार्थ जो न प्रकाश उत्सर्जित करता है, न परावर्तित करता है और न ही अवशोषित करता है।

प्रारंभिक माप बताते हैं कि सीडीजी-2 की कुल चमक लगभग 60 लाख सूर्य जैसे तारों के बराबर है। यह किसी सामान्य आकाशगंगा की तुलना में बेहद कम है। इस खोज का विवरण द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में भी प्रकाशित हुआ है। उल्लेखनीय है कि हबल स्पेस टेलीस्कोप का फ्लाइट ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में स्थित है। यह सेंटर ग्रीनबेल्ट (मैरीलैंड) में है। यह सेंटर 24 घंटे सक्रिय रहता है। इंजीनियर, वैज्ञानिक और फ्लाइट कंट्रोलर की टीम हबल के संचालन की निगरानी करती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

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