सफल होने के लिए दिमाग से ज्यादा दिल की सुनें: रामबहादुर राय

24 Feb 2026 20:08:53
'महिलाएं काम और शांति' पुस्तक लोकार्पण


लेखिका नीलम गुप्ता


नई दिल्ली, 24 फरवरी (हि.स.)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने मंगलवार को कहा कि हिंसा अशांति और निराशा से निकलने के लिए दिमाग से ज्यादा दिल की सुनें, तभी पूर्ण रूप से अपने क्षेत्र में सफल हो सकते हैं।

रामबहादुर राय ने यह बात आज नई दिल्ली स्थित आईजीएनसीए के कलानिधि विभाग की ओर से 'महिलाएं काम और शांति' पुस्तक लोकार्पण एवं परिचर्चा कार्यक्रम में कही। वरिष्ठ पत्रकार विश्लेषक एवं लेखिका नीलम गुप्ता द्वारा अनुवादित इस पुस्तक का प्रकाशन 'नवजीवन सामप्रत्' ने किया है।

उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा, अगर आपको अंधेरे से बाहर निकलना है, आप रोशनी की तलाश में हैं, तो यह पुस्तक सूरज की किरण की तरह काम करेगी।

इस पुस्तक की लेखिका इला रमेश भट्ट (1933–2022) के विचारों को भारतीय समाज में महिला सशक्तिकरण श्रम गरिमा और शांति स्थापना के महत्वपूर्ण आयामों से जोड़ते हुए राय ने कहा कि उनकी अनुवादित यह पुस्तक समकालीन समाज के लिए प्रेरक मार्गदर्शक का कार्य करेगी। यह पुस्तक भाषणों का संकलन है लेकिन इसमें सिर्फ बोले हुए शब्द नहीं है बल्कि गहन अनुभव हैं और ये अनुभव आकाश जैसा है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में सिर्फ भारतीय महिलाओं की चिंता नहीं है बल्कि दक्षिण-एशियाई महिलाओं की चिंता है।

इला भट्ट से अपनी मुलाकात को याद करते हुए नीलम ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि वह पहली बार 1989 में दिल्ली में तब मिली थीं जब वे राज्यसभा सदस्य थीं। उन्होंने आर्थिक रूप से पिछड़ी और कामकाजी महिलाओं की सहायता के लिए 'सेवा बैंक' की नींव रखी थी। आज यह बैंक 23 राज्यों में अपनी पहचान बना चुका है और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहा है। उन्होंने कहा, उनकी पुस्तक 'अनुबंध' का अनुवाद भी मैंने ही किया था और बाद में मुझे इस वर्तमान पुस्तक के अनुवाद का उत्तरदायित्व भी सौंपा गया।'

उन्होंने सुझाव दिया कि नए अनुवादकों को सबसे पहले पुस्तक को गहराई से पढ़ना चाहिए ताकि वे उसके मूल भाव को समझ सकें और उसी के अनुरूप शब्दों का चुनाव करें।

लेखन का एक बड़ा उद्देश्य यह दिखाना है कि महिला सशक्तिकरण केवल आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह 'विश्व शांति' के लिए भी अनिवार्य है। जब महिलाएं सशक्त होंगी, तो समाज में स्थिरता और शांति आएगी।

इस मौके पर गुजरात विद्यापीठ के पूर्व कुलपति सुदर्शन आयंगर वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता रजनी बख्शी सामाजिक कार्यकर्ता रेनाना झाबवाला और शोधार्थियों, पत्रकारों सहित अन्य गणमान्य जनों की उपस्थिति रही।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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