
नई दिल्ली, 27 फरवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि बजट का आकलन उसके प्रत्यक्ष लाभ या प्रभाव से नहीं बल्कि इसमें निहित नीतिगत प्रयासों से होना चाहिए। असल में राष्ट्रीय बजट कोई अल्पकालिक व्यापार दस्तावेज़ नहीं होता है। यह एक नीतिगत रोडमैप होता है। ऐसे में बजट की प्रभावशीलता का आंकलन ठोस पैरामीटर्स पर किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री आज वीडियो कांफ्रेंसिंग से बजट बाद वेबिनार- “विकसित भारत के लिए टेक्नोलॉजी, सुधार और फाइनेंस” को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बजट को ढांचागत सुविधाओं के विस्तार, धन प्रवाह, जीवन जीने में आसानी, पारदर्शिता के साथ शासन और लोगों के लिए नए-नए अवसर बनाने की दृष्टि से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज देश रिफोर्म एक्सप्रेस पर सवार है। इस प्रवाह को बनाए रखने के लिए हमें नीतिगत मंशा और उससे हासिल उपलब्धि पर भी फोकस करना है।
उन्होंने कहा कि हमें एआई, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स का व्यापक उपयोग कर पारदर्शिता, गति और जवाबदेही बढ़ानी ही होगी और साथ ही शिकायत निवारण प्रणालियों से प्रभाव की निरंतर निगरानी भी करनी होगी।
प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत को सरकार के ढांचागत सुविधाओं में निवेश का लभा उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पिछले 11 सालों में ढांचागत सुविधाओं के विस्तार के लिए बजट 2 लाख करोड़ से बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये के पार हो गया है। इतने बड़े पैमाने पर सरकारी निवेश निजी क्षेत्र के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि उद्योग और वित्तीय संस्थान भी नई ऊर्जा के साथ आगे आएं।
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि परियोजनाओं की मंजूरी और मूल्यांकन प्रक्रिया को मजबूत करना जरूरी है, ताकि समय और पैसा बर्बाद न हो। लागत-लाभ और पूरी अवधि की लागत पर ध्यान देना चाहिए। बॉन्ड बाजार में सुधार कर दीर्घकालीन विकास, स्थिरता और विदेशी निवेश बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए भरोसा, तरलता, नए साधन और बेहतर जोखिम प्रबंधन जरूरी हैं। उन्होंने सभी हितधारकों से बजट के नए अवसरों का लाभ उठाने और मिलकर बेहतर परिणाम देने की अपील की।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा