मराठी विश्वकोश में 1857 संग्राम को ‘उठाव’ लिखने पर विवाद, संशोधन की मांग को लेकर विधानमंडल में याचिका दायर

28 Feb 2026 14:51:53
मराठी विश्वकोशाचा संग्रहित फोटो


- विधानमंडल मे संशोधन की मांग करने वाली याचिका दायर- स्वाधीनता संग्राम को ‘उठाव’ कहेने पर दर्ज कराई आपत्ति

नागपुर, 28 फरवरी (हिं.स.)। महाराष्ट्र शासन के मराठी विश्वकोश मंडल द्वारा प्रकाशित मराठी विश्वकोश में 1857 के स्वाधीनता संग्राम को ‘उठाव’ (विद्रोह) के रूप में उल्लेखित किए जाने को लेकर राज्य में विवाद गहराता जा रहा है। स्वाधीनता सेनानियों के योगदान का अपमान किए जाने का आरोप लगाते हुए पत्रकारिता, साहित्य, सांस्कृतिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक व्यक्तियों ने राज्य विधानमंडल के पीठासीन अधिकारियों के समक्ष संशोधन की मांग करते हुए याचिका दायर की है।

याचिका में कहा गया है कि 1857 का संघर्ष केवल ‘उठाव’ या ‘विद्रोह’ नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ा गया पहला सशस्त्र स्वाधीनता संग्राम था। इस संदर्भ में क्रांतिकारी विचारक विनायक दामोदर सावरकर द्वारा लिखित पुस्तक '1857 चे स्वातंत्र्यसमर' का उल्लेख किया गया है, जिसमें इस संघर्ष को स्पष्ट रूप से स्वाधीनता संग्राम बताया गया है।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, मराठी विश्वकोश के खंड-1 और खंड-18 में इस ऐतिहासिक घटना को ‘अठराशे सत्तावनचा उठाव’ के रूप में दर्ज किया गया है, जबकि कुछ स्थानों पर इसे ‘विद्रोह’ तथा अन्य जगह ‘स्वाधीनता संग्राम’ कहा गया है। इस प्रकार के असंगत उल्लेख को इतिहास के साथ अन्याय बताया गया है।

स्वाधीनता सेनानियों के उल्लेख पर भी आपत्ति

याचिका में विशेष रूप से महान स्वाधीनता सेनानियों रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहेब और तात्या टोपे का एकवचन में उल्लेख किए जाने पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इन वीरों का सम्मानजनक और उचित संदर्भ में उल्लेख किया जाना आवश्यक है।

झांसी की रानी के शौर्य, तात्या टोपे के बलिदान तथा 1857 के संघर्ष की वीरगाथा का उल्लेख वसंत वरखेडकर की कृति 'सत्तावनचा सेनानी' में भी विस्तार से होने की बात याचिका में कही गई है।

विधानसभा अध्यक्ष व परिषद सभापति को सौंपा ज्ञापन

नागपुर के वरिष्ठ पत्रकार अविनाश पाठक के नेतृत्व में यह याचिका महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर तथा विधान परिषद के सभापति राम शिंदे को सौंप दी गई है। याचिका पर अनेक पत्रकारों, साहित्यकारों और प्रतिष्ठित नागरिकों के हस्ताक्षर बताए गए हैं।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए याचिका की प्रतियां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत को भी भेजी गई हैं। संबंधित विश्वकोश के पृष्ठों की छायाप्रतियां भी याचिका के साथ संलग्न की गई हैं।

इतिहास और राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा की मांग

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि ऐतिहासिक घटनाओं की संज्ञा और संदर्भ में परिवर्तन राष्ट्रीय स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने के समान है। उन्होंने मांग की है कि मराठी विश्वकोश के आगामी संस्करणों और आधिकारिक वेबसाइट पर तत्काल संशोधन करते हुए 1857 के संघर्ष को स्पष्ट रूप से ‘स्वाधीनता संग्राम’ के रूप में दर्ज किया जाए तथा स्वाधीनता सेनानियों का सम्मानपूर्ण उल्लेख सुनिश्चित किया जाए।

अब इस संवेदनशील विषय पर राज्य सरकार और विधानमंडल क्या निर्णय लेते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।-------------------

हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुलकर्णी

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