अल्पसंख्यक पूजा स्थलों पर हमलों के खिलाफ देशव्यापी कानूनी व जनआंदोलन चलाने की घोषणा

04 Feb 2026 22:11:53
इंडियन मुस्लिम्स फॉर सिविल राइट्स (आईएमसीआर) और एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) की कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया के सभागार में आयोजित संयुक्त बैठक


नई दिल्ली, 04 फ़रवरी (हि.स.)। देशभर में अल्पसंख्यक समुदायों के पूजा स्थलों पर बढ़ते हमलों, अवैध तोड़फोड़, कानूनी उत्पीड़न और प्रशासनिक ज्यादतियों के बीच इंडियन मुस्लिम्स फॉर सिविल राइट्स (आईएमसीआर) और एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) ने कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया के सभागार में एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक का आयोजन किया। बैठक की अध्यक्षता पटना उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति इक़बाल अहमद अंसारी ने की।

सभा को संबोधित करते हुए आईएमसीआर के अध्यक्ष मोहम्मद अदीब ने कहा कि देश में नफरत का माहौल चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुका है। मस्जिदों और चर्चों पर लगातार हो रहे हमलों तथा प्रशासनिक और संस्थागत चुप्पी पर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की।

पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने आपसी गलतफहमियों को दूर करने के लिए मस्जिदों और मदरसों को अन्य धर्मों के लोगों के लिए खोलने की ज़रूरत पर बल दिया।

सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने कहा कि बैठकों और चर्चाओं के साथ-साथ ठोस रणनीति और जमीनी स्तर पर संघर्ष जरूरी है।

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि अन्याय किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी हाशिए पर पड़े वर्ग इससे प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए इस संघर्ष का दायरा व्यापक होना चाहिए और सभी उत्पीड़ित समुदायों को इसमें शामिल किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि देशभर में लगभग 2,500 मस्जिदों को निशाना बनाए जाने की कोशिशें चल रही हैं। ईदगाहों, कब्रिस्तानों और मदरसों की जमीनों को विकास परियोजनाओं के नाम पर अधिग्रहित किया जा रहा है, जिससे अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक और सामाजिक अस्तित्व को गंभीर क्षति पहुंच रही है।

गुरुग्राम में तबलीगी जमात पर हमले, हल्द्वानी में बिना नोटिस की गई तोड़फोड़ और तरावीह एवं मुहर्रम जुलूसों के पारंपरिक मार्गों में जबरन बदलाव जैसे मामलों को संविधान का खुला उल्लंघन बताया गया।

सिख, ईसाई और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यह मुद्दा किसी एक धर्म का नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का है। सिख नेताओं ने गुरुग्राम में मस्जिदों के बंद होने के दौरान गुरुद्वारों में मुस्लिम नमाज़ की अनुमति दिए जाने को सांप्रदायिक सौहार्द का सशक्त उदाहरण बताया।

वक्ताओं ने याद दिलाया कि पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991, किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप में बदलाव पर रोक लगाता है, इसके बावजूद कानून का उल्लंघन लगातार जारी है।

बैठक के अंत में सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें अल्पसंख्यक पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कानूनी टीम और कानूनी रक्षा कोष का गठन, मस्जिद कमेटियों को कानूनी व प्रशासनिक नोटिसों से निपटने का प्रशिक्षण, वक्फ बोर्डों में राजनीतिक हस्तक्षेप के खिलाफ संगठित आवाज उठाना, अवैध तोड़फोड़ के पीड़ितों को त्वरित कानूनी व मानवीय सहायता प्रदान करना तथा आंदोलन को दिल्ली से आगे ग्रामीण और प्रभावित क्षेत्रों तक विस्तार देना शामिल है।

बैठक में दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, आईएमसीआर के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह, समाजवादी पार्टी के सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी और ज़िया-उर-रहमान बर्क, कांग्रेस सांसद हमदुल्लाह सईद, पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर जनरल जावेद इक़बाल, पूर्व आईएएस अधिकारी व राजनयिक अशोक कुमार शर्मा, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े और फ़ाज़िल अहमद अय्यूबी, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम ख़ान, ऑल इंडिया पीस मिशन के अध्यक्ष सरदार दिया सिंह, केंद्रीय सिंह सभा के अध्यक्ष सरदार खुशाल सिंह, याकूब अहमद, पूर्व मंत्री, उत्तराखंड सरकार,मौलाना ज़ाहिद रज़ा रिज़वी, पूर्व अध्यक्ष, मदरसा बोर्ड, उत्तराखंड सहित विभिन्न धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार/ मोहम्मद ओवैस

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मोहम्मद शहजाद

Powered By Sangraha 9.0