नई दिल्ली, 5 फरवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक एवं सामाजिक कार्यकर्ता इंद्रेश कुमार ने गुरुवार को कहा कि हमें विनाशकारी विचारधारा के बजाय मानवतावादी और राष्ट्रवादी मार्ग को चुनना चाहिए।
इंद्रेश कुमार ने यह बात आज दिल्ली स्थित इस्लामिक सांस्कृतिक केंद्र में मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) की ओर से आयोजित 'राष्ट्रीय सेमिनार' में कही। इसका विषय 'मज़हबी आशंकाओं के उन्मूलन के प्रयास था। इस दौरान 4 सत्र आयोजित किये गए। उन्होंने कहा, हमें एकता के सूत्रों को समझना और उनका बीजारूपण करना जरूरी है।
इंद्रेश ने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोग, चाहे वे बहुसंख्यक हों या अल्पसंख्यक, इस देश के 'मालिक' हैं। भारत में कोई भी 'काफिर' नहीं है क्योंकि भारत की पूरी आबादी किसी न किसी रूप में ईश्वर या शक्ति में विश्वास रखती है इसलिए यहां किसी को 'काफिर' कहना अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो दूसरों को काफिर कहता है, वास्तव में वह स्वयं गलत है। इंद्रेश कुमार ने जनता से अपील की है कि वे अपने आदर्श का चुनाव सही ढंग से करें।
उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम बनाम अजमल कसाब, दारा शिकोह बनाम औरंगजेब, इमाम हुसैन बनाम यजीद और कृष्ण बनाम कंस की तुलना करके उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हमें एक-दूसरे के धार्मिक स्थलों और उत्सवों का सम्मान करना चाहिए और उनमें शामिल होना चाहिए। जब हम विविधता को स्वीकार करेंगे, तभी नफरत खत्म होगी।
पूर्व विदेश मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि यदि हम एकजुट होकर रहें, तो हर समस्या का समाधान संभव है। इसके लिए शिक्षा के स्तर को सुधारना और एक-दूसरे के प्रति समझ विकसित करना अनिवार्य है। अक्सर हम पहली मुलाकात या सामान्य बातचीत के आधार पर दूसरों के प्रति एक धारणा बना लेते हैं, लेकिन वास्तविक प्रगति तब होती है जब हम उन पूर्वाग्रहों से ऊपर उठकर एक-दूसरे को समझते हैं।
वरिष्ठ स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. शफकत खान ने कहा कि वह व्यक्ति को हमेशा अपने देश और राष्ट्र को प्राथमिकता देनी चाहिए। केवल धार्मिक रीति-रिवाजों (जैसे पाँच वक्त की नमाज़) का पालन करने से कोई अच्छा इंसान नहीं बनता। इसके लिए स्वभाव और चरित्र में सुधार आवश्यक है। उन्होंने कहा कि परोपकार घर से शुरू होता है'। धार्मिक स्थलों पर सेवा खोजने से पहले अपने बीमार माता-पिता और परिवार की देखभाल करना जरूरी है। एक अच्छा इंसान बनने के लिए खुद को बदलना और अपनों के प्रति जिम्मेदार होना सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि युवाओं को कट्टरवाद और 'धार्मिक श्रेष्ठता' सिखाना देश के कीमती मानव संसाधन को बर्बाद करने जैसा है। अगर समाज खुद में सुधार नहीं करेगा, तो वक्त की धारा या बाहरी ताकतें उसे बदलने पर मजबूर कर देंगी। हिंदुस्थान समाचार के कार्यकारी संपादक सचिन बुधौलिया ने कहा कि सद्भाव की पहली शर्त अपने धर्म का सही ज्ञान है। जब हम स्वयं के धर्म को नहीं समझते, तो हमारी कमियाँ ही दूसरों के प्रति गलत धारणा का कारण बन जाती हैं। धर्म की बुनियादी बातें और उनकी समानताएँ स्थिर रहती हैं। यदि हम पूर्वाग्रहों को छोड़कर दूसरों के धर्म को गहराई से समझने का प्रयास करें, तो कठिन से कठिन चुनौती का सामना किया जा सकता है।
उच्च शिक्षा विशेषज्ञ डॉ गीता सिंह ने कहा कि धर्म को केवल उपदेशों में नहीं, बल्कि आचरण में उतारना अनिवार्य है। जब धर्म हमारे व्यवहार का हिस्सा बनता है, तभी हृदय से द्वेष और ईर्ष्या जैसे विकार स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।
कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं लेखक सुशील पंडित ने कहा कि हमें इन विषयों पर पूरी पारदर्शिता के साथ संवाद करना होगा। जब तक हमारे बीच यह ईमानदारी नहीं होगी, तब तक केवल बातों से कोई ठोस परिणाम नहीं निकलेगा। दिखावटी बातों का अब कोई स्थान नहीं है, क्योंकि जो कुछ घटित हो रहा है, वह स्पष्ट रूप से हमारे सामने है।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखक अरविंद मंडलोई ने कहा कि जब संवाद नहीं होता है तो अलगाव पैदा होता है। इसलिए एक- दूसरे से लगातार संवाद बना रहना चाहिए। साथ ही एक- दूसरे को जानना और समझना भी ज़रूरी है।
इस सेमिनार का उद्देश्य नई पीढ़ी को कट्टरवाद के अंधकार से निकालकर अंतरधार्मिक संवाद के प्रकाश की ओर ले जाना है। साथ ही ऐसे 'मानव संसाधन' का निर्माण करना चाहते हैं जो मजहबी श्रेष्ठता के बजाय मानवीय एकता और साझा सांस्कृतिक विरासत में विश्वास रखता हो। इस दौरान, पैनल चर्चाओं में अलग अलग क्षेत्रों के वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किये। बाद में उन्हें सम्मानित भी किया गया।
इस मौके पर मेवाड़ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. आलोक मिश्र, मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार, चित्तौड़गढ़ एवं मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार गदिया, मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन और वसुंधरा, गाजियाबाद के महासचिव अशोक कुमार सिंघल सहित अन्य गणमान्य जन मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी