नेपाल में प्रतिनिधि सभा के चुनाव की तारीख करीब आने के साथ ही कमजोर पड़ा पुनर्स्थापना का मुद्दा

युगवार्ता    05-Feb-2026
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नेपाल का सुप्रीम कोर्ट


काठमांडू, 05 फरवरी (हि.स.)। नेपाल में 5 मार्च को प्रतिनिधि सभा चुनाव की तारीख तय होने के साथ ही सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन प्रतिनिधि सभा पुनर्स्थापना से जुड़ा मुद्दा का औचित्य समाप्त होता नजर आ रहा है। जेन-ज़ी आंदोलन के बाद प्रतिनिधि सभा को भंग कर चुनाव की तारीख घोषित किए जाने के बाद सर्वोच्च अदालत में 18 याचिकाएं दायर की गई थीं। इन रिटों पर विपक्ष की ओर से लिखित जवाब दाखिल हो चुके हैं, लेकिन अदालत ने याचिकाकर्ताओं को साधारण तारीख पर ही रखा है।

इन रिट याचिकाओं पर सर्वोच्च अदालत ने न तो अंतरिम आदेश जारी किया और न ही उन्हें प्राथमिकता देने का निर्णय लिया। अब अदालत ने याचिकाकर्ताओं को 28 फरवरी की साधारण तारीख दी है। जबकि 5 मार्च को मतदान संपन्न हो जाएगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि अब सर्वोच्च अदालत में सुनवाई होने के बावजूद प्रतिनिधि सभा की पुनर्स्थापना की संभावना बहुत कम नजर आती है। अगर नवंबर महीने में तय पेशी में लगातार सुनवाई होती, तो फैसला संभव था। अब चुनावी प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है, ऐसे में सर्वोच्च अदालत के लिए चुनाव रोकने का आदेश देना मुश्किल है। उन्होंने आगे कहा कि जेन-ज़ी आंदोलन के बाद पुरानी संसद को फिर से बहाल करना अब एक महीने के भीतर संभव नहीं दिखता। राज्य ने चुनाव तैयारियों पर भारी निवेश कर दिया है, ऐसे में अदालत के लिए लगातार सुनवाई कर चुनाव रोकना व्यावहारिक नहीं है।

प्रतिनिधि सभा की पुनर्स्थापना की मांग को लेकर कई अधिवक्ताओं के साथ-साथ नेपाली कांग्रेस और नेकपा एमाले के तत्कालीन सांसद भी सर्वोच्च अदालत पहुंचे थे। जिन दलों ने संसद पुनर्स्थापना की मांग की थी, वही अब चुनावी मैदान में उतर चुके हैं, ऐसे में सर्वोच्च अदालत से इस मामले में त्वरित फैसला आने की संभावना कम मानी जा रही है।

इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, तत्कालीन सभामुख और निर्वाचन आयोग से लिखित जवाब मांगे थे। सभी प्रतिवादियों के लिखित जवाब अदालत में दाखिल हो चुके हैं। सभी पक्षों के जवाब आने के बाद सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ताओं को साधारण तारीख पर रखा है।

संवैधानिक बेंच में हफ्ते में सिर्फ एक दिन सुनवाई होती है। अगर 28 फरवरी से सुनवाई शुरू भी की जाती है, तो 18 अलग-अलग रिट पर सुनवाई पूरी होने के कई महीने का समय लग जाएगा। ऐसे में अगली सुनवाई ही चुनाव के बाद शुरू होगी। इसलिए अब राजनीतिक दलों का भी मानना ही कि संसद की पुनर्स्थापना असंभव है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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